“आत्मायत्तौ वृद्धिविनाशौ” आनंद शास्त्री
सम्माननीय मित्रों ! समय का पहिया चाहे कितना ही घूम जाये किन्तु संस्कारों का ठहरा रहना ही उचित है ! आज हिन्दीके बन्द हो चुके प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक के विद्यालयों की मांग राजनीति की भेंट चढ जाये इसका पुरजोर प्रयास होना प्रारम्भ हो चुका।इसके निहितार्थों को भी समझने की आवश्यकता है ! मैं … Read more