धम्मपद्द चित्तवग्गो~५ सूत्र- अंक~४०– आनंद शास्त्री
प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित-“धम्मपद्द” के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में चित्त वग्गो के पाँचवें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ– “दूरंगमं एकचरं असरीरं गुहासयं । ये चित्तंसंयमेस्सन्ति मोक्खन्ति मार बन्धना।।५।।” अब पुनः कहते हैं कि-” दूरंगमं एकचरं असरीरं गुहासयं” विषयों के प्रति … Read more