कोरोना सम्भल जा  -सुनील कुमार कानु

लाखो घर उजाड़कर तुझे लाज न आइ बच्चों से – माता पिता, परिवार से सन्तान छीन तुझे शर्म न आइ कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाई बच्चों की पढ़ाई-लिखाई छिन तुझे रोना नही आई बिजार, रास्ताघाट, श्मसान कर तेरी मौत न आइ कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना … Read more

अनुभव- संवेद अनु

अनैतिकता अमीरों या शहरों के लोगों में ही होती है ये एक गलत धारणा है। मैंने अपने पिछले 15-16 साल के जीवन में छोटे-छोटे रोजगारों के लिए 10-12 लोगों को अपनी सीमित आय से सहायता राशि (ब्याज रहित ऋण) मुहैय्या करवाई। हालांकि ऐसा करते हुए मैंने ये तय किया था कि ये छोटी रकम (500 … Read more

प्रेरक कहानी : *गुस्से को शान्त करने का एक सुंदर उदाहरण* 

एक वकील ने सुनाया हुआ एक हृदयस्पर्शी किस्सा – “मै अपने चेंबर में बैठा हुआ था, एक आदमी दनदनाता हुआ अन्दर घुसा। उसके हाथ में कागज़ो का बंडल, धूप में काला हुआ चेहरा, बढ़ी हुई दाढ़ी, सफेद कपड़े जिनमें पांयचों के पास मिट्टी लगी थी।” उसने कहा – “उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है, … Read more

सच्चा इश्क (कविता)

सच्चा इश्क (कविता) ————————– इश्क़ जरूरी है तुमसे जो तुम हो वैसे बाहर से नहीं जो अंदर से हो उससे और ये तुम कोई और नही है तुम हो | दूसरो का क्या रोना रोते हो ये बताओ तुम खुद कितने मोहब्बती हो खुद से पिछली बार कब बोली थी अपने मन में दबे जज़्बात … Read more

एक प्रेरक कहानी, “मैनें कोरोना को नही हराया”

“मेने कोरोना को नही हराया” ————————————— -मैं *एक प्रायवेट कम्पनी मे बाबू* हूँ हमेंशा की तरह कम्पनी मे मे काम कर रहा था मुझे हल्का बुखार आया शाम तक सर्दी भी हो गई पास ही के मेडिकल स्टोर से दवाइया बुला कर खाई 3-4 दिन थोडा ठीक रहा एक दिन अचानक साँस लेने मे दिक्कत … Read more

ग़जब_का_रिश्ता, एक मार्मिक कहानी जरूर पढ़े और परिवार वालों को भी सुनाएं

“#ग़जब_का_रिश्ता” मैं बिस्तर पर से उठा, अचानक छाती में दर्द होने लगा। मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसे विचारों के साथ मैं आगे वाली बैठक के कमरे में गया। मैंने देखा कि मेरा पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त था। “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’ मैंने पत्नी को देखकर कहा- “मेरी छाती में आज रोज से कुछ ज़्यादा … Read more

राष्ट्रीय कवि संगम, असम प्रांत द्वारा रामनवमी के पावन अवसर पर प्रभु श्रीराम को काव्य पुष्प अर्पित

“राष्ट्रीय कवि संगम, असम प्रांत के अन्तर्गत शोणितपुर शाखा” द्वारा 21 अप्रैल रामनवमी के पावन अवसर पर पूर्वोत्तर के आठ प्रांतों की एक संयुक्त वर्चुअल ई काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। शोणितपुर शाखा की महामंत्री वाणी बरठाकुर ने संचालन करते हुए सर्वप्रथम राम स्तुति में महापुरुष माधवदेव द्वारा रचित बरगीत का गायन से सभी … Read more

“कर्म-पथ”

“कर्म-पथ” राहगीर हो तुम अगर, तो तुम्हें कर्म पथ पर चलना होगा, माना आँधिया बहती है बहुत, मगर मसाल बनकर तुम्हें जलना होगा, यहाँ ठोकर बहुत मिलेगी तुम्हें राहों में मगर खुद को यहां संभालना होगा, कभी काटे हैं तो कभी फूल यहाँ मगर इन कांटों के बीच तुम्हें खिलना होगा! राहगीर हो तुम अगर, … Read more

कविता: स्त्री तू खुद की ताकत बन अब

स्त्री तू खुद की ताकत बन अब उठ, जाग, सजग हो नारी तू रणचंडी का अब रूप धर, हे स्त्री अब कमर कसकर हिंसा का प्रतिकार कर। सृष्टि की जननी है तू ही धरा पर जीवन – धात्री तू, मां, पत्नी, बहन, बेटी बन हर रिश्ते को संभालती तू। माना कि सादगी तेरा गहना है … Read more

*तुलसीदास जी के दो शिष्यों के बीच कोरोना वार्तालाप*

पहला शिष्य : बाहर निकल भ्रमण जिन कीन्हां। खाकी-गण दारुन दु:ख दीन्हां।। लम्ब डण्ड से होत ठुकाई। करहु नियंत्रण मन पर भाई।। डाउन लॉक रहहु गृह माहीं। भ्रमण फिज़ूल करहु तुम नाहीं।। दूसरा शिष्य : सत्य सखा तव सुंदर वचना भेदि न जाइ पुलिस की रचना खाकीधारी अति बलशाली मारहि लाठि देहिं बहु गाली पृष्ठ … Read more