” रंगों का त्यौहार है -होली “

हर्ष और उल्लास का त्योहार है-होली, प्रेम और मिलन का त्योहार है-होली, एक रंग में सब को रंगने का, रंगों का त्यौहार है -होली ! गिले-शिकवे भुला के, एक दूसरे को गले लगा के, दोस्तों के संग मौज मना के, गुलाल लगाने का त्योहार है होली! रंगों का त्योहार है-होली, खुशियों की बौछार है- होली, … Read more

“ कालेश्वर ज्योति ” लोकार्पण एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम संपन्न

आगरा । बटेश्वर तीर्थ बाह तहसील में महाशिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर साझा संकलन – कालेश्वर ज्योति का विमोचन मुख्य पुजारी श्री जय प्रकाश गोस्वामी, बाह सी. ओ. श्री प्रदीप कुमार, विष्णु प्रताप वर्मा ( समाज सेवी), बालकिशन वर्मा (पत्रकार- हिंदुस्तान), अवधेश कुमार निषाद मझवार ( युवा कलमकार ), मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (संपादक … Read more

हो अखिल विश्व में उड़नपरी का भाग्योदय -डाक्टर श्रीधर द्विवेदी

हो अखिल विश्व में उड़नपरी का भाग्योदय -डाक्टर श्रीधर द्विवेदी नौगांव धान के खेतों से उतरी , कौन है यह स्वर्णमयी उड़नपरी , कहाँ की है यह धिंग एक्सप्रेस , किस किशोरी ने खोला मदिरा के खिलाफ मोर्चा ? जन गण मन सुन , किसके नयनों से फूट पड़ी, हर्षाश्रु स्वाति चातक कपोल , मोती … Read more

“जीवन दर्पण” पुस्तक समीक्षा- अशोक वर्मा

“जीवन दर्पण” पुस्तक समीक्षा- अशोक वर्मा ज्ञानार्जन एक साधना है । निष्ठा, आत्मप्रत्यय निरन्तर अध्ययन-मनन आदि से व्यक्ति ऋद्ध होता है । वह स्वयं ही खुद को अनुप्रेरित करता है । उसकी दृष्टिभंगी, अनुभूति प्रबल होती है । उसकी समझदारी प्रशंसा करने लायक होती है । किसी विषय पर, समस्या पर उसकी अभिव्यक्ति चकित करती … Read more

प्रेरक कहानी, कभी किसी की परेशानी का मजाक नहीं उड़ाना

एक *चूहा* एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था। एक दिन *चूहे* ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक *चूहेदानी* थी। ख़तरा भाँपने पर उस ने … Read more

बेईमान दुकानदार की कहानी: हम जैसा करते हैं, हमें फल भी वैसा ही मिलता है

बेईमान दुकानदार की कहानी: हम जैसा करते हैं, हमें फल भी वैसा ही मिलता है एक किसान के पास खूब सारी गाय हुआ करती थी और इन गायों के दूध से ये किसान मक्खन निकालकर गांव के लोगों को बेचा करता था। एक दिन ये किसान अपने मक्खन को बचने के लिए बाजार जाता है … Read more

*एक सच्ची प्रेरणा दायक कहानी*

रमेश चंद्र शर्मा जो पंजाब के ‘खन्ना’ नामक शहर में एक मेडिकल स्टोर चलाते थे,उन्होंने अपने जीवन का एक पृष्ठ खोल कर सुनाया जो पाठकों की आँखें भी खोल सकता है और शायद उस पाप से,जिस में वह भागीदार बना, उससे भी बचा सकता है। रमेश चंद्र शर्मा का मेडिकल स्टोर जो कि अपने स्थान … Read more

*एक लड़की से किसी ने पूछा -*

*एक लड़की से किसी ने पूछा -* तुम एक घर छोड़कर दूसरे घर में जाती हो, भला क्या बदलता है। वह लड़की खिलखिला दी, फिर हौले से मुस्कराई, नजरें नीची करके बोली- सच कह रहे हैं आप एक घर से दूसरे घर जाती हूं, पर आगे का सवाल थोड़ा गंभीर है, आपने मुझसे पूछा भला … Read more

कही हज़ारो मे मिलते, दो चार है हमलोग।।

कभी शाख मे है तो कभी जड़ मे है हमलोग, कही हज़ारो मे मिलते, दो चार है हमलोग।। यूँ तो मिलते नहीं काश ढूंढ़ने से भी कभी कभी मिल जाते है आँगन मे टहलते हुए हमलोग।। हम कौन है और किस वजह से है, क्या बताये कभी यूँ ही बेवजह ज़िन्दगी जी लेते है हमलोग।। … Read more

उत्तरपूर्व पर केंद्रित पत्रिका “प्राग्ज्योतिका” के दूसरे अंक का लोकार्पण असम के उत्तरकमलाबाड़ी सत्र के सत्राधिकार श्री श्री जनार्दनदेव गोस्वामी प्रभु और माननीय मुख्यमंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल के करकमलों से हुआ।

साहित्य, मानविकी, समाज विज्ञान, और प्रदर्शनधर्मी कलाओं पर केंद्रित ‘प्राग्ज्योतिका’ पत्रिका का वर्तमान अंक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव पर केंद्रित है। प्राग्ज्योतिका एक त्रैमासिक पत्रिका है जो प्रो. चन्दन कुमार के सम्पादकत्व में निकलती है। प्रो. चन्दन दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक हैं और कई वर्षों से पूर्वोत्तर भारत के साहित्य, समाज और संस्कृति … Read more