फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं?

फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं? —- नीलू गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल गणतंत्र दिवस पर आज मैंने ख़ूब बधाइयां पाई! पर सच्ची गणतंत्रता देखने को अब भी है आंखें पथराई ! हिस्से में आज जनता के कैसी बदहाली आईं, काम बिना रिश्वत के कोई आज भी न बन पाई! फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं पर सबने … Read more

” देश गान “

” देश गान ” कश्मीर से कन्याकुमारी तक असम से गुजरात तक कोटि कंठ से गूंजे एक ही स्वर जय भारती….. जय भारती… जय भारती….!! सूरज चमके तेरे ही भाल पर सर पे है ताज हिमाला…. पाँव चूमे सागर अबिरत कंठ मे गंगा की माला… जय भारती… जय भारती… जय भारती….! ऊँचे ऊँचे परबत हमारे … Read more

शब्दों की धार का लोकार्पन

तिनसुकिया, 23जनवरी ( मनोज कुमार ओझा )धेमाजी पुस्तक मेले में आज सिलापथार के युवा कवि मुकेश सिंह की प्रथम काव्य संग्रह शब्दों की धार का विमोचन हुआ। प्रसिद्ध असमिया लेखिका विनीता गाड़ोदिया तथा निवेदिता हन्दिकै ने किया। उक्त कार्यक्रम में धेमाजी के प्रतिष्ठित व्यवसायी उमेश खंडेलिया, दर्पण की भाषा के आविष्कर्ता ड० उत्तम दास, सिमेन … Read more

हिन्दी साहित्य के एक युग का अंत !

हिन्दी साहित्याकाश में अपनी लेखनी की स्वर्णिम आभा बिखेरने वाले लब्धप्रतिष्ठित हिन्दी साहित्यकार तथा हिन्दुस्तान पेपर कॉरपोरेशन/काछाड़ पेपर मिल ,पंचग्राम(आसाम) के भूतपूर्व राजभाषा अधिकारी ,नराकास शिलचर के भूतपूर्व सचिव डॉ प्रमथ नाथ मिश्रा का बिगत दिनांक ०८-०१-२०२१(शुक्रवार) दोपहर १२.४५ बजे बनारस (उत्तर प्रदेश) में देहांत हो गया। आप पिछले एक महीने से बीमार चल रहे … Read more

कहानी : ” बनारसी साड़ियां “

— मनोज कुमार ओझा आधी रात बीतने को है, और मैं फेसबुक पर बैठा लिख रहा हूँ, जाहिर है न तो कमैंट्स की अभिलाषा है न लाइक्स पाने की ललक. बस मन को हल्का करने के लिये लिख रहा हूँ. वैसे भी अब मेरी जिंदगी मेँ है ही क्या जो आपलोग मुझे लाइक करें और … Read more

काश! हम कुत्ता पाले होते – डॉ अवधेश कुमार अवध

बहुतेरे लोग कुत्ता पालते हैं। नहीं भी पालते हैं। दूसरे भी बहुत से पालतू जीवों को पालते हैं। विविध आदतों को भी पालते हैं। पालने पर कोई रोक भी नहीं है। पाल भी सकते हैं। नहीं भी पाल सकते हैं। मनुष्य का स्वभाव है पालना, इसलिए भी पालता है। तनहाई दूर करने के लिए भी … Read more

लघुकथा

बाहर बारिश हो रही थी, और अन्दर क्लास चल रही थी. तभी टीचर ने बच्चों से पूछा – अगर तुम सभी को 100-100 रुपया दिए जाए तो तुम सब क्या क्या खरीदोगे ? किसी ने कहा – मैं वीडियो गेम खरीदुंगा.. किसी ने कहा – मैं क्रिकेट का बेट खरीदुंगा.. किसी ने कहा – मैं … Read more

चिकित्सा विज्ञान में एकीकृत दृष्टिकोण: समय की आवश्यकता

भारत में लगभग 1.33 बिलियन (अरब) लोग रहते है, जोकि दुनिया मे दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है। भारत में विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों का एक व्यापक नेटवर्क है। मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों ( एम्स) की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। वर्ष 2020 के आंकड़ो के अनुसार देश में … Read more

गुजर रहा है वर्ष २०२० का , लम्हा धीरे – धीरे

गुजर रहा है वर्ष २०२० का , लम्हा धीरे – धीरे मानो कोई अपना , हमसे जुदा हो रहा है | माना कि वर्ष २०२० ने , छीन लिया हमसे आजादी | पर कुछ अच्छी यादें भी हमें, भेंट किये जा रहा हैे | २०२० हमें जिंदगी जीने का हुनर सीखा गया | खो चुके … Read more

महासंकट में लंगर / इस संस्कृति को प्रणाम

महासंकट में लंगर / इस संस्कृति को प्रणाम कहते हैं महासंकट में , किसी देश की संस्कृति , नस्ल इंसान ईमान कमान, खरे सोने की पहचान होती है । कोरोना विषाणु उपभेद के , उभरने की खबर क्या फैली , दहशत में पूरा यूरोप इंग्लैंड , पूरे यू के में फिर से नाकाबंदी , केंट … Read more