फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं?
फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं? —- नीलू गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल गणतंत्र दिवस पर आज मैंने ख़ूब बधाइयां पाई! पर सच्ची गणतंत्रता देखने को अब भी है आंखें पथराई ! हिस्से में आज जनता के कैसी बदहाली आईं, काम बिना रिश्वत के कोई आज भी न बन पाई! फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं पर सबने … Read more