साहित्य
कविता यूपी
हैं राम हमारे यू पी में हैं श्याम हमारे यू पी में शिव की काशी है यू पी मे रहते सन्यासी यू पी में ब्रज का पनघट है यू पी में गंगा का तट है यू पी में मोदी का मेला यू पी में योगी … Read more
हमारा काकोरी कांड
वह भी क्या उम्र थी वह भी क्या उम्र था वह भी क्या जोश था, भरी जवानी में हम भरी जवानी में हम देश के खातिर लड़ते गए देश के खातिर काकोरी कांड तो किया फांसी पे भी हंसते हंसते छड़ते गये। वह भी क्या उम्र थी वह भी क्या उम्र था वह भी क्या … Read more
गुरछली, — मदन सुमित्रा सिंघल
गुरछली को घर वाले घर के ही काम में लगा दिया वो अनचाही संतान थी सातवें महीने में पधारने के कारण कमजोर थी तो गुरछली नाम भी रख दिया ईश्वर ने उसे एक कम देने में कंजुसी करदी इसलिए सपने सोच लिया कि इसकी शादी तो होनी नहीं है इसलिए घर आंगन बुहारना सारे गाँव … Read more
चोरी ओर सेवा — मदन सुमित्रा सिंघल
कृपा नगर में भंडारा स्वामी के नाम से मशहूर हरसुख साधारण दुकानदार था वो शहर में धार्मिक अनुष्ठान करने तथा बङे बङे धनाड्य लोगों के नाम से भंडारा लगाते थे। केदारनाथ का बहुत बङा कारोबार था इसलिए उन्हें किसी के यहाँ जन्म मृत्यु एवं शादी में जाने की फुर्सत नहीं तो कभी जरूरत भी नहीं … Read more
बिनणी ( लघुकथा)
धन्या अपर्णा देवी जयसिंह के पांव छु कर आशीर्वाद लिया तो धन्या बोली दादी पहचाना नहीं मैं आपकी धन्नू तो अपर्णा बोली बिनणी तु विदेशी शिक्षा लेकर मेरे पोते शुक्र के साथ वैज्ञानिक बनकर आई हो। हम उतराखंड के तुम्हारे माँ बाप मुबंई के मराठी तो भला तुझे कैसे पहचान सकती हुं। शुक्र ने इसारा … Read more
गुनगुनी धूप
दिसंबर के महीने के साथ बुजुर्ग अक्सर सहमने लगते हैं हाड़-मांस के पुतले गुनगुनी धूप ढ़ूढ़ते हैं उन्हें मालूम है कि घर के पिछवाड़े में नीम की टहनियों से छनकर दिसंबर की गुनगुनी धूप फैलने का प्रयास करेंगी प्रकृति आखिर सबका ख्याल रखती है बुजुर्ग ढ़ूढ़ते हैं चाय की चंद चुस्कियां गरमा-गरम चाय की प्याली … Read more
एक अनोखा साथी
रात की चादर में लिपटा हुआ तू हर पल मेरे संग रहा जब साथ छोड़ा सबने मेरा मेरे पास तेरा ही रंग रहा। तु खड़ा होता साथ मेरे आँखो की अनकही बात लिए सबसे अलग, सबसे दूर भी मैं रहता हूँ सदा तेरा साथ लिए । सैकड़ों के बीच होकर भी मैं तुझसे जुदा न … Read more
वैवाहिक वर्षगांठ — संजय एवं नीलू,
थामकर यूं ही एक दूसरे का हाथ चलते रहें जिंदगी के सफर में, विवाह के इस वर्षगांठ पर आज चलो फिर से ऐसा प्रण कर लें। विश्वास के इस बंधन में न आए कभी कोई दरार, हालात चाहे जैसे भी हो परवान चढ़ता रहे हमारा प्यार। सात फेरों से बना ये रिश्ता दिनों दिन मजबूत … Read more
बात नाजायज थी….
बात नाजायज थी, जमी नहीं हमको, सौगात उनकी मोड़ दी ठाकुर सिक्कों में तोलते हैं ,जज्बात उनकी रियासत में , दुनिया ये उनकी हमने छोड़ दी ठाकुर कहानी दिलकश थी उनकी ,बुनियाद मगर झूठ पर टिकी, ना दिल में बसी, ना जहन में छपी बेशक दलीलें उन्होंने करोड़ दी ठाकुर दुश्वारियां ,मुसीबतें, तकलीफें सबसे पार … Read more