बंदर की आत्मीयता ( कहानी)

एक बंदरी के दो बच्चे थे वो काका रुङीमल की हवेली पर ही इधर उधर फुदकते थे। काकी सरबती मोटी मोटी रोटी व छाछ हवेली पर रखवा देती तो आराम से खा पीकर पेङो पर चले जाते। एक दिन बहेलिये ने बंदरी एवं एक बच्चे को बंधक बनाकर सांकली डालकर ले गया। छोटा सा बच्चा … Read more

भूल का प्रायश्चित  दो वादे…..

ट्रेन अपनी गति से उसके गाँव की ओर बढ़ी चली जा रही थी। रंजना पूरे तेरह साल बाद  गाँव जा रही थी। उसके पिताजी अपने अंतिम साँसें ले रहे थे। उसने अपनी आँखें बंद करके सर को बर्थ के पीछे की दीवार से टिका दिया था। तेरह साल पुरानी यादें उसकी आँखों के आगे घूम … Read more

फेसबुक फ्रेंडशिप से सावधान रहे 

सलोनी ने आज कई दिनों के बाद फेसबुक खोला था, एग्जाम के कारण उसने अपने स्मार्ट फोन से दूरी बना ली थी, फेसबुक ओपन हुआ तो उसने देखा की 35-40 फ्रेंड रिक्वेस्ट पेंडिंग पड़ी थीं, उसने एक सरसरी निगाह से सबको देखना शुरू कर दिया, तभी उसकी नज़र एक लड़के की रिक्वेस्ट पर ठहर गई, … Read more

कैसे लोग अपने पिता का घुमना- फिरना बंद कर देते हैं……..

बहू मैं इस घर का चौकीदार नहीं हूं पापा बस हम लोग निकल रहे हैं। शाम तक लौट आएँगे। आप प्लीज घर का ख्याल रखना हां आपका खाना टेबल पर रख दिया है। जब भी भूख लगे, लेकर खा लेना। रात तक का ही खाना बना दिया है। हम लोगों को आने में देर हो … Read more

कहानी: रुके रुके से कदम

“✍️पवन✍️✍️… मैं आ रही हूं, तुम मेरा इंतज़ार करना.” कहते हुए पूर्वा ने फोन रखा ही था कि तभी उसे कुणाल की आवाज़ सुनाई दी, “किससे बात हो रही है? और कहां जाने की तैयारी है?” कुणाल ने उसके बगल में बैठते हुए पूछा. “✍️कुछ✍️✍️ नहीं, बस एक सहेली से मिलने का प्रोग्राम बना रही … Read more

बेटी नहीं मां है

एक पिता ने अपनी बेटी की सगाई करवाई,* *लड़का बड़े अच्छे घर से था* *तो पिता बहुत खुश हुए। *लड़के ओर लड़के के माता पिता का स्वभाव बड़ा अच्छा था..तो पिता के सिर से बड़ा बोझ उतर गया। *एक दिन शादी से पहले_लड़के वालो ने लड़की के पिता को खाने पे बुलाया।* *पिता की तबीयत … Read more

सहयोग

सहयोग की महिमा अपार रूपया एक हो या हजार।। बूंद-बूंद से भरता घड़ा सहयोग से होता मंजिल खड़ा।। सहयोग मे मिला एक आना या करोड़ सहयोग का नहीं है कोई तोड़।। सहयोग मे देता कोई धन कोई करता अर्पित मन।। सहयोग का अर्थ ही है तन मन धन।। सहयोग होता है अतुलनीय सहयोग न होता … Read more

कहानी

आस पास के किसी गाँव में कॉलेज न होने से मुझे पढ़ने के लिए में शहर आना पड़ा । यहां किसी रिश्तेदार का एक कमरे का बिना किराये का मकान मिल गया था। आस-पास निर्धन लोगो के घर थे। यहां अकेले होने के कारण सारे काम मुझे खुद ही करने पड़ते थे। खाना-बनाना, कपड़े धोना, … Read more

समाज ले ऐसी करवट

यह कैसा सत्संग , जहां सैकड़ों लोग , कुचल कर मर जायेँ , मृत्यु की भेंट चढ़ जायेँ । यह कैसा पाखंड , जहां चरण रज , कालरज अन्त्येष्टि बन जाये , सबकी सांस उखड़ जाये । यह कैसा कथा प्रवचन , ‘भोले बाबा’ बन कर प्रवंचन , ‘साकार विश्वहरि’ बन कर , गरीब वंचितों का शोषण , लेकर भोलेनाथ का सहारा , ठग … Read more

समाज को चिंता करनी चाहिए ,,     बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं ??

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं।  समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं। समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी … Read more