बंदर की आत्मीयता ( कहानी)
एक बंदरी के दो बच्चे थे वो काका रुङीमल की हवेली पर ही इधर उधर फुदकते थे। काकी सरबती मोटी मोटी रोटी व छाछ हवेली पर रखवा देती तो आराम से खा पीकर पेङो पर चले जाते। एक दिन बहेलिये ने बंदरी एवं एक बच्चे को बंधक बनाकर सांकली डालकर ले गया। छोटा सा बच्चा … Read more