कहानी: कच्ची डगर

आज खाना बनाते हुए सीमा के मन में रह-रह कर विचारों की तरंगें उठ रही थीं. पिछले कई दिनों से वह देख रही थी कि उसकी किशोरवय बेटी श्‍वेता उसके कमरे में पैर रखते ही चौंक पड़ती है. श्‍वेता का स्टडी टेबल खिड़की के पास है इसलिए पढ़ते समय उसकी पीठ दरवाज़े की तरफ़ रहती … Read more

अनमोल उपहार

आंखो में आंसु आ गए पढ़ कर एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा…”चिट्ठी ले लीजिये।” आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी…” अभी आ रही हूँ…ठहरो।” लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा..”अरे भाई! कोई … Read more

रक्षाबंधन पर मार्मिक कहानी  भाई बहन का प्यार

ये कहानी लक्ष्मीकांत पांडेय जी की हैं…. और जब मैंने पढ़ा तो मेरी आंखों में से आंसू नहीं रुक रहे थे… आशा करती हूं आप सभी को पसंद आएगी… ये कोई कहानी नही बल्कि आँखों देखी सच्ची घटना है….!! मेरी छोटी बुआ….!!!! रक्षाबंधन का त्यौहार पास आते ही मुझे सबसे ज्यादा जमशेदपुर (झारखण्ड )वाली बुआ … Read more

राखी की थाली– (नयन कुमार राठी- विभूति फीचर्स)

रिंकी बिल्ली अपने घर के आगे राखी की थाली सजाकर बैठी है। वनवासी उसके सामने से निकलकर जा रहे हैं। अधिकतर कलाइयां राखियों से सजी हैं। उसे इस तरह बैठे देख सभी मुस्कुराते हुए जा रहे हैं। पर थाली सजाने का कारण कोई नहीं पूछ रहा है। हर बरस रिंकी इसी तरह रक्षाबंधन के दिन … Read more

राखी बनाम वचन पर्व

थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी। इस राखी में छुपी हुई  है, अरमानों की  साखी।। चंदन रोरी अक्षत मिसरी, आकुल कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो  समझो, हम हैं बहुत अभागे।। क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी? अथवा कोई और वजह है, मुझे बता दो भाई ? अब आँखों को चैन नहीं … Read more

Hindi Kavita: अटल बिहारी वाजपेयी की 2 चुनिंदा कविताएं

चौराहे पर लुटता चीर, प्यादे से पिट गया वज़ीर, चलूँ आख़िरी चाल कि बाज़ी छोड़ विरक्ति रचाऊँ मैं? राह कौन-सी जाऊँ मैं? सपना जन्मा और मर गया, मधु ऋतु में ही बाग़ झर गया, तिनके टूटे हुए बटोरूँ या नवसृष्टि सजाऊँ मैं? राह कौन-सी जाऊँ मैं? दो दिन मिले उधार में घाटों के व्यापार में … Read more

मैंने सुना है देखा है  —डाक्टर श्रीधर द्विवेदी

मैं स्वतंत्रता काल की संतति हूं , मैंने माँ के गर्भकाल में ही , नेताजी सुभाषचंद्र बोस का उद्घोष , आजाद हिन्द फौज का गान और निसान , अंदमान -निकोबार में उनकी पदचाप , सब कुछ देखा और सुना है I फिर आया चिर प्रतीक्षित , पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ सैतालिस , उससे जुड़ी त्याग … Read more

सुसज्जित भारत     — डोली शाह

सुसज्जित भारत देश हमारा, उत्तर में  हिमालय, दक्षिण में रत्नाकर, पूर्व  स्थित अरुणाचल, पश्चिम ढका रण कच्छ का।  देश निकला, इतिहासों की भट्टी से, उग्र अनल लहू की ज्वाला समेटे। कुर्बानियों का ढेर सजाकर, निहत्थे लोगों पर , हथियार दिखाकर पहरा था कहीं लुटेरों का! लेकिन, लेकिन होता नाज देख व्यक्तित्व तिलक ,सावरकर ,आजाद, प्रगति … Read more

मानवता कराह रही है

कहीं गर्मी से तो कहीं पानी से पृकृति कहर ढा रही है अपने पङोसी देश में मानवता कराह रही है क्या कसुर इन मासुमो का ना किसी से लेना देना खाये दो समय रोटी वो भी छीनी जा रही है मानवता कराह रही है नारी का गहना अस्मत सरे आम लूटी जा रही है जला … Read more

आधुनिकता के चक्कर में इनको ना भूलें 

कानपुर से लौटते वक्त जब मेरी गाड़ी संख्या 12394 सम्पूर्ण क्रान्ति एक्सप्रेस #मिर्जापुर पहुँची तब रात के पौने तीन बज चुके थे।           मिर्जापुर स्टेशन से बाहर निकलते ही कुछ ई-रिक्शा वाले, टैम्पो वाले ने पूछा कि कहाँ जाना है साहब? लेकिन मेरी निगाह एक बुजुर्ग पैडल रिक्शा चालक की ओर … Read more