यह प्रेम के देश की राह नहीं

इन आँखों ने देखी न राह कहीं इन्हें धो गया नेह का नीर नहीं, करती मिट जाने की साध कभी, इन प्राणों को मूक अधीर नहीं, अलि छोड़ो न जीवन की तरणी, उस सागर में जहाँ तीर नहीं! कभी देखा नहीं वह देश जहाँ, प्रिय से कम मादक पीर नहीं! जिसको मरुभूमि समुद्र हुआ उस … Read more

नहीं हलाहल शेष

नहीं हलाहल शेष, तरल ज्वाला से अब प्याला भरती हूँ विष तो मैंने पिया, सभी को व्यापी नीलकंठता मेरी; घेरे नीला ज्वार गगन को बाँधे भू को छाँह अँधेरी; सपने जमकर आज हो गए चलती-फिरती नील शिलाएँ, आज अमरता के पथ को मैं जलकर उजियाला करती हूँ। हिम से सीझा है यह दीपक आँसू से … Read more

हिन्दी का श्रृंगार करें

हिन्दी दिवस पर्व हमारा हिन्दी का गुणगान करें, हिन्दी से ही है सब कुछ इसकी सुगंध का ज्ञान करें।। हिन्दी हमारी मातृभाषा है हिन्दी को जीवन में भरें, हिन्दी से ही है भारतीयता स्वर चेतना का श्रृंगार करें।। जिसमें रचा संविधान हमारा उस हिन्दी का पहचान करें, जिसमें विज्ञान का चमत्कार भरा उस शीर्ष सिन्ध … Read more

आदर्श नारी या आदर्श पुरुष 

हे समाज वर्षों से तुमने आदर्श नारी की मांग बुलंद की पर तुमने आदर्श पुरुष नहीं माँगा राम और कृष्ण को तुमने भगवान् बना मंदिर में बिठा दिया मगर उनके अवतार में दिखाये गए आदर्श पुरुष की भूमिका को गये भूल हर आदर्श नारी को चाहिए होता है एक आदर्श पुरुष तुम ये भी गये … Read more

Hindi Diwas Par Kavita: हिंदी की इन टॉप 5 कविताओं को देख राष्ट्रभाषा से हो जाएगा प्रेम, देखें हिंदी दिवस की कविता

Hindi Diwas Par Kavita Hindi Mein (हिंदी पर छोटी सी कविता): क्या आप जानते हैं कि हमारे देश की राष्ट्रभाषा को समर्पित भी एक दिन है। इस खास दिन को हिंदी दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। हर साल 14 सितंबर को हम भारतीय हिंदी दिवस मनाते हैं। इस दिन स्कूल, कॉलेज और … Read more

युग के युवा मत देख दाएँ और बाएं – हरिवंश राय बच्चन 

युग के युवा, मत देख दाएँ, और बाएँ, और पीछे, झाँक मत बगलें, न अपनी आँख कर नीचे; अगर कुछ देखना है, देख अपने वे वृषभ कंधे जिन्हें देता निमंत्रण सामने तेरे पड़ा युग का जुआ, युग के युवा! तुझको अगर कुछ देखना है, देख दुर्गम और गहरी घाटियाँ जिनमें करोड़ों संकटों के बीच में … Read more

हमारे दरमियां क्या था?

आग थी, बिजली थी, बारिश थी, तूफां था हमारे दरमियां क्या था? तुम्हारे होंठ हिलते थे तितलियां हर सूं उड़ती थीं हमारी उंगलियां जब भी कभी आपस में मिलती थीं  ओस थी, पानी था, आंसू थे, पसीना था हमारे दरमियां क्या था? आग थी, बिजली थी, बारिश थी, तूफां था हमारे दरमियां क्या था? बदन … Read more

कहता तुमको युग मानव – सुमित्रानंदन पंत

दर्प दीप्त मनु पुत्र, देव, कहता तुमको युग मानव, नहीं जानता वह, यह मानव मन का आत्म पराभव! नहीं जानता, मन का युग मानव आत्मा का शैशव, नहीं जानता मनु का सुत निज अंतर्नभ का वैभव! जिन स्वर्गिक शिखरों पर करते रहे देव नित विचरण, जिस शाश्वत मुख के प्रकाश से भरते रहे दिशा क्षण, … Read more

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी: जिनकी कविताएँ आज भी बच्चों को दे रहीं जीवटता, कर्मठता और भारतीयता के संस्कार — कुमार ललित

  सूरज सदा समय से आता और समय से जाता है चंदा सदा समय से आता और समय से जाता है तारे सदा समय से आते और समय से जाते हैं सारी दुनिया का चक्कर ये प्रतिदिन एक लगाते हैं हैं कितने पाबंद समय के पल भर देर नहीं करते ठीक समय से सोते हैं … Read more

कहानी: जो दिल को छू जाए, #गायत्री_निवास : एक बेहद मार्मिक कहानी 

      पढ़िए एक थोड़ी सी पुरानी कहानी , बिलकुल ही एक नये अंदाज में और जानिए कि क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति???        बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आकर शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गयी। सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का … Read more