यह प्रेम के देश की राह नहीं
इन आँखों ने देखी न राह कहीं इन्हें धो गया नेह का नीर नहीं, करती मिट जाने की साध कभी, इन प्राणों को मूक अधीर नहीं, अलि छोड़ो न जीवन की तरणी, उस सागर में जहाँ तीर नहीं! कभी देखा नहीं वह देश जहाँ, प्रिय से कम मादक पीर नहीं! जिसको मरुभूमि समुद्र हुआ उस … Read more