हमें शांति चाहिए

हमें शांति चाहिए
मै एक रात बड़ा हैरान हुआ
सोच – सोच कर बड़ा परेशान हुआ
आज मानव, मानव को काट मारने को तैयार है
अपने स्वार्थ हेतु मानव के गर्दन पर खींच रखी तलवार है
इंसानियत – मानवता बस बेबस लाचार है
जिनके पास यश, शक्ति है वे स्वयं मे चूर है
अपने शक्ति के मद मे रखते बड़ा गुरुर है
वे सत्य, अहिंसा, शांति, मानवता से अभी दूर है
वे अपने महत्वाकांक्षा की हल ढूंढ़ते है युद्ध मे
पर भूल जाते है कि मानवता की रक्षा है केवल बुद्ध मे
परन्तु जब अधर्म का घड़ा भर जाएं
तो अजेय चक्रधारी कृष्ण भी कहते है महाभारत हो जाएं॥
पवन कुमार शर्मा  (शिक्षक)

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