भारत देश ऐसा कोई सौगात नहीं,  मेरे मामा का जवाब नहीं।।

सब बहनों का एक है भाई, सबसे आगे मामा आई। उनके जैसा अनुज नहीं, मेरे मामा का जवाब नहीं।। जो बोलेंगे वही करेंगे, कभी किसी से नहीं डरेंगे। भारत का स्वाभिमान है, असम का अभिमान वही है।। आपके जैसा कोई नवाब नहीं, मेरे मामा का जवाब नहीं।। जो आया है हमने गाया है, मामा जो … Read more

मैं प्यार नहीं दे पाऊंगा 

तू कंप्यूटर युग की छोरी, मन की काली तन की गोरी ! किंतु तुम्हें मैं अपनी बाहों का, गलहार नहीं दे पाऊंगा !  तू माफ करो मुझको देवी ,मैं  प्यार नहीं दे पाऊंगा !! तुम फैशन टीवी की चैनल  , मैं संस्कार का चैनल हूं ! तुम मिनरल वाटर की बोतल, मैं गंगा का पावन … Read more

रौद्र नाद

हे पाखण्ड-खण्डिनी कविते! तापिक राग जगा दे तू। सारा कलुष सोख ले सूरज, ऐसी आग लगा दे तू।। कविता सुनने आने वाले, हर श्रोता का वन्दन है। लेकिन उससे पहले सबसे, मेरा एक निवेदन है।। आज माधुरी घोल शब्द के, रस में न तो डुबोऊँगा। न मैं नाज-नखरों से उपजी, मीठी कथा पिरोऊँगा।। न तो … Read more

रघुवीर सहाय की तीन क्रांतिकारी कविताएं

रघुवीर सहाय की तीन क्रांतिकारी कविताएं तोड़ो तोड़ो तोड़ो- रघुवीर सहाय तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है आधे आधे गाने तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये ऊसर बंजर … Read more

ख्वाहिश नहीं, मुझे मशहूर होने की

        _आप मुझे “पहचानते” हो,_         _बस इतना ही “काफी” है।_? _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा “जाना” मुझे,_         _जिसकी जितनी “जरूरत” थी_         _उसने उतना ही “पहचाना “मुझे!_ _जिन्दगी का “फलसफा” भी_ _कितना अजीब है,_         _”शामें … Read more

पुस्तक चर्चा… तीन श्रेष्ठ कवियों की पत्रकारिता का आकलन – कृपाशंकर चौबे

हिंदी के तमाम मूर्धन्य संपादक पत्रकारिता के किसी संस्थान या विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित नहीं थे। किंतु वे अपने आप में प्रशिक्षण संस्थान थे। वे पूरे के पूरे पाठ्यक्रम थे और वे ही प्रयोगशाला थे। उनके भीतर अपने समाज को देखने और समझने की अचूक दृष्टि थी। इसलिए पत्रकारिता के पश्चिमी सिद्धांतों को रटने से कहीं … Read more

हिंदी दिवस परिचर्चा: हिंदी पत्रिका का अवसान?

  हिंदी पत्रिकाएं समसामयिक सवालों से बचती रहीं और आधुनिकतावाद का डट कर सामना करने की बजाय सांप्रदायिक पहचान के निकट आती गईं. ‘क्या उपन्यास/ कहानी/ नई कहानी/नाटक मर गया?’ जैसे सवालों पर बहसियाने या छायावाद पर मुहल्ला-छाप लड़ाई लड़ना उन्हें आसान पड़ता था, उन्होंने वही किया. हिंदी पत्रिका का अवसान? नई दिल्ली: हिंदी पत्रिकाओं … Read more

गौरवमय हिंदी भाषा

गौरवमय हिंदी भाषा की कुछ अलग ही है अंदाज़, मधुर वचन से सजी रहेती, है दिल में करती राज I हिंदी-हिंदी से सजी यह अपना देश हिन्दुस्तान, विश्वभर में हिंदी भाषा की होती रहेती बड़ा ही सम्मान I हर शब्द और हर एक बोली है हिंदी की महान, देश विदेशो में बनी है हमारी एक … Read more

हिंदी ओर बिंदी ( कविता 1998)

भारत माता के मस्तक पर रक्तवर्ण सी बिंदी है कलकल करती बहती नदियाँ सबकी वाणी हिंदी है हिंदी व बिंदी की कीमत, सबके समझ नहीं आती बिन बिंदी वो रहे अधुरी पूर्ण रुप वो ना पाती बने दस गुना मुल्यवान वो जिसके पास चली जाती उसी रुप में देश विदेश में हिंदी भाषा की ख्याति … Read more

Hindi Diwas Par Kavita: हिन्दी दिवस पर पढ़ें- 5 महान कविओं की सबसे अच्छी हिन्दी कविताएं

Hindi ki Sabse Acchhi Kavitayen: हिन्दी की कविताएं भारतीय साहित्य की समृद्ध धरोहर हैं। ये विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं का अद्भुत संगम हैं। हिंदी साहित्य में भक्ति, शृंगार, वीर, करुणा और शांत रस प्रमुख रूप से देखे जाते हैं। कालिदास, सूरदास, कबीर, तुलसीदास जैसे कवियों ने भक्ति और दर्शन का सुंदर चित्रण किया है। वहीं, … Read more