समालोचना शिलचर आधारित एक लघुकथा
संजीव की माँ आज बहुत गुस्से में थी। सुबह से ही वह बड़बड़ाए जा रही थी। इधर गुस्से में बड़बड़ाना और सरौते से सुपारी काट-काट कर उन्होंने पान की थाली भर दी थी। वह उनकी बहु सुगंधा रसोई में कातला मछली का कालिया तैयार कर रही थी। आज दिन ही खास था। आज उसकी दीदी … Read more