समालोचना शिलचर आधारित एक लघुकथा

संजीव की माँ आज बहुत गुस्से में थी। सुबह से ही वह बड़बड़ाए जा रही थी। इधर गुस्से में बड़बड़ाना और सरौते से सुपारी काट-काट कर उन्होंने पान की थाली भर दी थी। वह उनकी बहु सुगंधा रसोई में कातला मछली का कालिया तैयार कर रही थी। आज दिन ही खास था। आज उसकी दीदी … Read more

इंतजार कविता – डॉ मधुछंदा चक्रवर्ती

बरसों से इन आँखों में बसा है कुछ लम्हों का इंतज़ार देखने को तरस रही ये आँखें कभी न होती बेज़ार बरसों से इन आँखों में बसा हे कुछ लम्हों का इंतज़ार बारिश की बुंदे टप-टप छत पर टपके फूलों की पंखुड़ियों में बुंदे झपके कमल के पत्तों में ये बुंदे मोती से बने आकाश … Read more

आंसू

आंसू पश्चाताप से बहे, दुख से बहे, मगर कोई क़ीमत नहीं शायद मेरे आंसुओं की। बहुत बार गलतियां की बहुत बार माफ़ी मांगी मग़र कोई असर नहीं शायद मेरे आंसुओं की। जीने के लिए मकसद है, मकसद के लिए बुलन्द है दिल, बेख़ौफ़ आगे तक बढ़े, यही सोच मैंने अपने कमज़ोर आंसुओं को रोका था। … Read more

जब उकता जाओ 

  चमकीली दुनिया की दिखावट से उजले चेहरों की झूठी मुस्कुराहट से हर सवाल पर झूठ मूठ बताये गये अच्छे हाल से इर्द गिर्द बुने हुए मतलब के जाल से कथनी-करनी के अंतर से चापलूसी के मंतर से फिज़ूल की दौड़ से आपस की होड़ से नफ़रत के चलन से लोगों की जलन से रिश्तों … Read more

आज नहीं तो कल होगा

भावना कन्यालीकोट, उत्तराखंड आज नहीं तो कल होगा, जो सच है, वह सच में होगा, क्या सच में कभी आएगा? ये कल, जाने गुजर गए कितने कल, इंतज़ार में इस कल के, जब हो जाऊंगी मैं सफल, देती दिलासा खुद को मैं, चलती रहती हूं हर हाल में मैं, भूलकर कभी थक कर बैठ जाती … Read more

प्रदीप कुमार ने मिट्टी का दिया बनाकर अपने पैतृक पेशे को जीवित रखा

किशन माला शिलचर, 27 अक्टूबर: प्रदीप कुमार ने कहा कि उन्होंने दिवाली के लिए 70 से 80 हजार मिट्टी का दिया बनाया हैं। मिट्टी का बर्तन बनाना उनका पारिवारिक व्यवसाय है। एक उच्च शिक्षित कुम्हार। शिलचर शहर के पास शिलकुड़ी का एक युवक प्रदीप कुमार पढ़ाई के साथ-साथ अपने पिता के आजीविका में सहयोग करने … Read more

यह समाज

कवि- अज्ञात बांग्ला से हिंदी अनुवादक- अशोक वर्मा ओ जी, आप जाने पहचाने लगते हैं हां, मैं इसी मोहल्ले में रहता था। ओ किसे चाहिए? जी, पुराने किसी को देख नहीं पा रहा, उन्हीं को ढूंढता हूँ। तो किसे चाहते हैं आप” जी, वही तो पुराने किसी को नहीं देख पा रहा हूँ। अच्छा, उस … Read more

चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती…

जब कोई पूछता है “चाय पियेंगे” तो बस नहीं पूछता वो तुमसे दूध, चीनी और चायपत्ती को उबालकर बनी हुई एक कप  चाय के लिए। वो पूछता हैं… क्या आप बांटना चाहेंगे कुछ चीनी सी मीठी यादें कुछ चायपत्ती सी कड़वी दुःख भरी बातें..! वो पूछता है.. क्या आप चाहेंगे बाँटना मुझसे अपने कुछ अनुभव, … Read more

प्रेरक कहानी  बिहारी होते हैं कर्मयोगी

अभी कोलकाता से पटना की फ्लाइट पकड़ने के लिए बोर्डिंग गेट पर बैठा था और भी बहुत सारे लोग थे। मेरे सामने की कुर्सी पर एक व्यक्ति अर्द्धनिद्रा में थे। उनके नाखून और तेल से भीगें बाल बता रहे थे कि बहुत मेहनत वाला काम करते होंगे। जब नींद खुली तो उन्होंने फ्लाइट के बारे … Read more

सच कड़वा होता है 

उस बिल्डिंग में वह हमारा पहला दिन था. थकान की वजह से सब का बुरा हाल था. हम लोग व्यवस्थित होने की कोशिश में थे कि घंटी बजी. दरवाजा खोल कर देखा तो सामने एक महिला खड़ी थीं. अपना परिचय देते हुए वह बोलीं, ‘‘मेरा नाम नीलिमा है. आप के सामने वाले फ्लैट में रहती … Read more