” नया साल और नई राह..”

नया साल आया, नई राहें खुली, एक नई शुरुआत, नए सपने बुनी। पुराने पन्ने पलटे, नए अध्याय शुरू, नई उमंगें, नई आशाएं, नई राहें चुनी। नई राहों पर चलने की हिम्मत बढ़ी, नए सपनों को पूरा करने की ताकत बढ़ी। पुराने डर भुलाए, नई चुनौतियों का सामना किया, नई राहों पर चलने का साहस बढ़ा। … Read more

सर्दी में क्यों नहीं नहाना (कविता का शीर्षक) – मधुछंदा चक्रवर्ती

सर्दी है सूखे का मौसम, सर्दी में पापड़ सूखते हैं। पापड़ गीला हो जाए तो उसका कोई अस्तित्व नहीं रहता। सर्दी है आसमान में छाए घने बादलों का मौसम, जो अगर बरस जाएं तो धरती की फसलों का सपना अधूरा रह जाता है। सर्दी है घने कोहरे का मौसम, कोहरे में अगर पानी बरसे तो … Read more

*ये मिडिल क्लास आदमी*

किसने लिखा पता नहीं पर लिखने वाले ने बहुत ही गज़ब का लिखा है। बहुत बारीकी से मुल्यांकन किये हैं ????? “मिडिल-क्लास” का होना भी किसी वरदान से कम नहीं है. कभी बोरियत नहीं होती. जिंदगी भर कुछ ना कुछ आफत लगी ही रहती है. मिडिल क्लास वालों की स्थिति सबसे दयनीय होती है, न … Read more

जब कमा लेना, तब मुझे बुलाना

रात के 12 बज रहे थे। आदित्य का फोन आया। फोन पर एक धीमी आवाज में फुसफुसाहट हुई – “हेलो…” बिट्टू ने भी धीमे स्वर में जवाब दिया, “हां बोलो…” आदित्य ने पूछा, “सब तैयारी हो गई? सुबह 4 बजे की बस है।” बिट्टू ने कहा, “हां, मेरे कपड़े पैक हो गए हैं। बस पैसे … Read more

प्राण का चमत्कारी काव्य 

द्वयक्षरीय रचना =========== प्रिय मित्रो ! पूर्व में आपको मैंने अपनी एकाक्षरीय रचनाओं से परिचित कराया था । आज भी मात्र दो वर्णों “त” तथा “ल” के मेल से रची अपनी एक ताजी रचना से परिचय कराता हूँ। इसे चित्र काव्य के अन्तर्गत लिया जाता है। रचना की किसी भी पँक्ति को द्रुत गति से … Read more

शहर से बढ़िके गांव भईल बा।

पीपर पाकड़ सजी कटाइल कठिन डगर आ छांव भइल बा। रंगबाजी अब पांव पसरलस, शहर से बढिके गाँव भइल बा।। नेह से भारी नेट भईल बा, बड़हन सबके पेट भईल बा। मोबाइल से मेसेज जाता, महंगा सबसे भेंट भईल बा।। कहीं पसीना बहत नइखे पूरवाई अब लहत नइखे अचखा पचखा मारला बिना केहू तनिको अब … Read more

पत्नी कैसी चाहिए?

संभोग शादी का स्तंभ है, लेकिन समाज इस बात को मनाने से कतराता है समाज का कहना है कि शादी सिर्फ संभोग के लिए नहीं होती है, और भी कारण हैं, लेकिन यदि किसी से पूछो कि तुम्हे सब मिलेगा बस सेक्स करने को नहीं मिलेगा तो इसे कोई शादी करने को तैयार नहीं होगा … Read more

थोड़ी आँच बची रहने दो थोड़ा धुआँ निकलने दो

मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे इस बूढ़े पीपल की छाया में सुस्ताने आएँगे हौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेड़ो मत हम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आएँगे थोड़ी आँच बची रहने दो थोड़ा धुआँ निकलने दो तुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफ़िर आएँगे उनको क्या मालूम निरूपित इस सिकता पर क्या बीती … Read more

“नई सीख(कहानी)

अप्रैल का महीना था। वसंत ऋतु में उस दिन साहिल की नींद कोयल की मीठी कूक से खुल गई थी। आंखों को मलते हुए साहिल खिड़की के पास पहुंचा तो उसने देखा कि घर के बाहर खड़े आम के पेड़ के पत्तों के झुरमुट में छिपकर कोयल अपने सुमधुर स्वर में अब भी कुहू-कुहू गा … Read more

छूट गइल माई क अचरा

छूटल गांव सिवान हो। दू पइसा के खातिन अइलीं, शहरी बन अनजान हो। कहे के बा की गांव के माटी से अन धन बरसेला। महंगी बा एतना की अब, ओसे ना पेट भरेला। पइसा जब भेजब तब जीयल ऊँहा होई आसान हो। दू पइसा के खातिन अइलीं, शहरी बन अनजान हो। उठल भीत बा घर … Read more