दान का परिणाम

सुबह का वक्त था। निशा ने बिस्तर से उठते हुए घड़ी पर नजर डाली। सुबह के साढ़े पांच बज चुके थे। काफी देर से वह जगी हुई थी, लेकिन बिस्तर छोड़ने का मन नहीं हो रहा था। खिड़की से छनकर आती हल्की रोशनी ने इशारा किया कि दिन की शुरुआत हो चुकी है। उसने सोचा, … Read more

पिता और पुत्र 

कई साल पहले एक कहानी पढ़ कर बहुत रोया था। एक आदमी ने, जो बड़ी कंपनी में बड़े पद पर नौकरी करता था, गांव से आए अपने पिता को दोस्तों के आगे पहचानने से इंकार कर दिया था। बाद में उसने अपने पिता को टोका भी था कि ऐसे कैसे बिना बताए चले आए? आपको … Read more

प्रेरक कहानी  लगभग दस साल का अखबार बेचने वाला बालक एक मकान का गेट बजा रहा है..  (शायद उस दिन अखबार नहीं छपा होगा)

मालकिन – बाहर आकर पूछी “क्या है ? बालक – “आंटी जी क्या मैं आपका गार्डेन साफ कर दूं? मालकिन – नहीं, हमें नहीं करवाना.. बालक – हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्वर में.. “प्लीज आंटी जी करा लीजिये न, अच्छे से साफ करूंगा। मालकिन – द्रवित होते हुए “अच्छा ठीक है, कितने पैसा लेगा? बालक … Read more

रुनुबाला

कहानी है साल १९५० के दशक की। असम का बदरपुर शहर और उसी शहर से सटा गाँव नाम श्रीगौरी। ये गाँव जैसा नाम वैसा ही देखने में सुन्दर। हरे-भरे खेत, चारों तरफ हरियाली-ही-हरियाली, छोटे-बड़े हर घर के पीछे एक छोटा सा पोखर, चारों तरफ आम, कटहल, नारियल, सुपारी के पेड़। घरों के किनारे तथा रास्ते … Read more

“पतंग”

मकर संक्रांति पर लोग दही और चूड़ा क्यों खाते हैं?

सुनो सुनो ऐ दुनिवालो मुस्कुराती ये पतंग क्या कहती है , ऊँचे गगन में उड़ती है, और ऊपर ही उठने को कहती है । हवा की मंशा जानने को सही दिशा को पाने को , माना कि थोड़ा वक़्त लगे,धीरज मन में धरने को । फिर अपने रंग में आ, मस्ती से वहाँ विचरती है … Read more

कठिन परिस्थिति

एक गांव में एक व्यापारी रहता था, जिसकी एक खूबसूरत बेटी थी। व्यापारी पर भारी कर्ज हो गया था, और जिस व्यक्ति से उसने यह कर्ज लिया था, वह बेहद चालाक और नीच स्वभाव का था। जब व्यापारी कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गया, तो वह व्यक्ति गांव वालों को बुलाकर व्यापारी के घर पहुंचा। … Read more

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं (काव्यांजलि)

अलाव की गर्माहट हो, तिल-गुड़ के लड्डुओं की मिठास की शुभकामनाएं ! सुख खड़ा हो द्वार आपके, शान्ति और समृद्धि का वास हो, कोई न हताश हो, चहुंओर उल्लास हो मकर संक्रांति की शुभकामनाएं ! खुशियों की तरंग हो, आसमां में हर तरफ पतंग ही पतंग हो, मकर संक्रांति की शुभकामनाएं ! विश्वास की डोर … Read more

रुनुबाला (डा. मधु छंदा चक्रवर्ती द्वारा लिखित बराकघाटी के बदरपुर के निकट स्थित श्रीगौरी गांव की कहानी)

कहानी है साल 1950 के दशक की। असम का बदरपुर शहर और उसी शहर से सटा गाँव नाम श्रीगौरी। ये गाँव जैसा नाम वैसा ही देखने में सुन्दर। हरे-भरे खेत, चारों तरफ हरियाली-ही-हरियाली, छोटे-बड़े हर घर के पीछे एक छोटा सा पोखर, चारों तरफ आम, कटहल, नारियल, सुपारी के पेड़। घरों के किनारे तथा रास्ते … Read more

आज कल बेवकूफ होती है पढ़ी लिखी जिम्मेदार औरतें भी……

अपने वर्किंग लेडी होने का हुनर , घर संभालने की अकड़ धरी कि धरी रह जाती है जब वो फेसबुक पर होती हैं……… ऑफिस से थक हार कर , घर के किचेन और बच्चों की पढ़ाई से फुर्सत पा कर इंस्टा, वाट्सअप और फेसबुक की वॉल पर जब वो खुद को ढूंढने आती है तो … Read more

नववर्ष की शुभकामनाएं !

उन सभी हलधरों को जो कड़कड़ाती ठंड में भी मिट्टी से सोना पैदा करने में निरंतर लगे हैं ! नववर्ष की शुभकामनाएं ! उन सभी वीर जवानों को जो सीमा पर दुश्मन से लोहा लेने के लिए हरदम डटे हैं ! नववर्ष की शुभकामनाएं ! चूल्हे पर रोटियां पकातीं उन सभी स्त्री शक्तियों को जो … Read more