बेटियां किसी से कम नहीं होती

अपनी प्लेट में दो तरह की आइसक्रीम का मज़ा लेती सुनीता ने अपने देवर विनोद को कहा, “क्या देवर जी तीसरी बेटी होने पे कौन पार्टी देता है? अब तो दहेज़ के पैसे जुटाना शुरू कर दो।” अपनी भाभी के प्लेट को देख हँसते हुए विनोद ने कहा, अरे भाभी ! “आप क्यूँ चिंता करती … Read more

दिलों का मिलन है होली।

रंग से रंग मिलता है, मुझमें तू मिल। रंग दे जिंदगी को, मुझमें तू खिल। रंग बदल मत देना, मुझे तू दर्द न देना। तू ही रहे मेरी मोहब्बत, इसके सिवा कोई ग़म मत देना। रंग से रंग मिलता है, मुझमें तू मिल। होली को दिल से मनाएंगे, रंगों से जिंदगी भरेंगे। रंग दे मेरी … Read more

जरा

जरा,ज़रा ठहरकर आना, कुछ काम बाकी है। सोचता हूँ लोग मुझे देखते रहें, उनसे कुछ बात बाकी है । समय का नजारा देख, कहने को मजबूर हुए ; तेरे आने का संकेत , अपने लोग दूर हुए । चाहत थी पकड़ कर रखूँगा उसको पर लाचार विवश मन था , गोरा चमड़ा, स्थूल रूप मेरा … Read more

होली की रंगीन रात

होली की रंगीन रात में, खुशियों की बारिश होती है। रंगों की धूम में खो जाओ, होली की रंगीन रात में। रंगों का त्योहार होली है, खुशियों का त्योहार होली है। रंगों की धूम में खो जाओ, रंगों का त्योहार होली है। होली की शुभकामनाएँ तुम्हें, खुशियों की बारिश हो तुम पर। रंगों की धूम … Read more

दोल यात्रा

रंगों की गुलालों की पिचकारियों की, मदमस्तों की ये होली। राधा-कृष्ण की शोभा यात्रा, संकीर्तन की, जय घोषों की, ये होली। जहाँ भी जाती, छा जाती है मतवालों की ये होली। आनंद से भर देती है सबकी ये झोली। देखो आयी है मनमोहक सी ये दोल यात्रा, निमाई की ये टोली खेलने लगे सब बालक-वृंद … Read more

जीवन की राह में

जीवन की राह में चलते जाओ, हर कदम पर नई उमंग लाओ। खुशियों और ग़म को साथ लेकर चलो, जीवन की राह में सफलता पाओ। सफलता की कुंजी है मेहनत, हर दिन नई उमंग से करो करतब। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, हर कदम पर नई चुनौती लो भली। जीवन का अर्थ है … Read more

11 मार्च/बलिदान-दिवस अमर बलिदानी छत्रपति सम्भाजी

भारत में हिन्दू धर्म की रक्षार्थ अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। छत्रपति शिवाजी के बड़े पुत्र सम्भाजी भी इस मणिमाला के एक गौरवपूर्ण मोती हैं। उनका जन्म 14 मई, 1657 को मां सोयराबाई की कोख से  हुआ था। तीन अपै्रल, 1680 को शिवाजी के देहान्त के बाद सम्भाजी ने हिन्दवी साम्राज्य … Read more

कौन हूँ मैं?

कौन हूँ मैं? पूछूँ मैं किससे, क्या है मेरी पहचान? पूछूँ मैं चाँद-तारों से, या पूछूँ मैं ज़मीं-आसमान से? कौन हूँ मैं? क्या है मेरी पहचान? क्या मैं सूरज की किरण हूँ, या बहती हवाओं की ठंडक हूँ? क्या मैं फूलों की महकती खुशबू हूँ, या बहती नदी का पानी हूँ? कौन हूँ मैं? क्या … Read more

सच्ची दोस्ती

सारे जहाँ को पता है, सच्ची दोस्ती कितनी प्यारी है। अनजान थे इस जहाँ में, मिली जो यारी, वो सबसे न्यारी है। ज़िंदगी के लिए जीना ज़रूरी है, जीने के लिए अरमान ज़रूरी है। दिल में चाहे हज़ारों ग़म हों, फिर भी दोस्ती में प्यार ज़रूरी है। एक दोस्त, तू ही तो है, जो हर … Read more

मां का दर्द – डॉ मधुछंदा चक्रवर्ती

शिलचर के रंगीरखारी इलाके के बड़े से घर में मुखर्जी परिवार रहता था। उच्च मध्यवर्गीय लोग, आय भी अच्छी थी। परिवार संयुक्त था। घर में उमा मुखर्जी, शंकर मुखर्जी और उनके दो बेटे सजल और सौरभ। दोनों की शादी हो चुकी थी। बड़ी बहु तुली सजल की और पायल सौरभ की पत्नी बन इस घर … Read more