युद्ध से संबंधित प्रेरक कहनी
“मैं प्लेन में बैठ चुका था, दिल्ली जा रहा था—लगभग छह घंटे की यात्रा। सोचा था—चुपचाप बैठकर थोड़ी किताब पढ़ूंगा और बीच में कुछ देर आँखें भी मूंद लूंगा। टेकऑफ से ठीक पहले देखा कि प्लेन का दरवाज़ा फिर से खोला गया और एक दल भारत के जवानों का अंदर आया—करीब दस के आस-पास। वे … Read more