वैश्विक स्तर पर हिन्दी का बढ़ता प्रभाव ।– डॉ. गरिमा संजय दुबे 

भाषा वह सेतु है जो एक मनुष्य को दूसरे से जोड़ती है | मनुष्य और पशुओं में यदि भेद चिन्हित किए  जाएं तो दो भेद मुख्य हैं, भाषा और बुद्धि | भाषा का ज्ञान, उसका व्याकरण उसका लिखित स्वरूप मनुष्य के विकास की सबसे महत्वपूर्ण घटना है | विभिन्न क्षेत्रों के मनुष्यों की विभिन्न भाषाओं … Read more

एक सामयिक समस्या पर लघु चर्चा :चिकित्सालय :  करुणा , सेवा के स्थान , संघर्ष , घमासान  की जगह नहीं  -डाक्टर श्रीधर द्विवेदी

आजकल अक्सर समाचार पत्रों ,टेलीविजन और सामाजिक संचार पटलों पर चिकित्सकों , अस्पताल ले कर्मचारियों से दुर्व्यवहार ,मार पिटाई , और अब दुष्कर्म -हत्या  की खबरें आती रहती हैं  आज से पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं होती थी ।घटना की गंभीरता को देखते हुये प्रतिक्रियायें भी पढ़ने को मिलती थी पर कर्मचारियों के साथ बलात्कार और … Read more

हिंदी – ताकि भारत के सब लोग एक दूसरे को समझ पाएँ – भावना सक्सैना

आज एक सितंबर है, आग़ाज़ हैं उस माह का जिसमें संविधान सभा द्वारा हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। 14 सितंबर 2024 को हिंदी को राजभाषा बने हुए पचहत्तर वर्ष पूरे हो रहे हैं। आज जब हम भारत के अमृतकाल में हैं, हमारे लिए यह मंथन करना बहुत आवश्यक हो जाता … Read more

राम राज्य की कल्पना और हमारे जीवन में राम के आदर्श: एक चिंतन।–शिव कुमार

आज के दौर में राम राज्य की कल्पना करना आम बात हो गई है। हर कोई एक ऐसे समाज की इच्छा रखता है जहां शांति, समृद्धि, और न्याय हो। लेकिन, इस राम राज्य की कल्पना करते हुए क्या हम वास्तव में भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतार पा रहे हैं? शायद नहीं। … Read more

बंगाल की पूरी सत्ता कठघरे में — अवधेश कुमार

वैसे तो पिछले एक महीने में बच्चियों के साथ हुऎ बर्बर दुष्कर्मों ने पूरे देश को हिलाया है किंतु कोलकाता के आईजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की घटना ने समाज के हर वर्ग को उद्वेलित किया है। यह बिलकुल स्वाभाविक है। मेडिकल कॉलेज के अंदर एक डॉक्टर के साथ जघन्य अपराध, फिर स्वयं अस्पताल प्रशासन … Read more

मोदी सरकार का लगातार हर मुद्दे पर पीछे हटना कही न कही एक सवाल है।यह आत्मविश्वास का मसला है या कुछ और              सवाल आत्मविश्वास का है – अमिय भूषण 

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक बयान इन दिनों सुर्खियों में है।इस बयान में उन्होंने कहा है की हमने प्रधानमंत्री मोदी के आत्मविश्वास को तोड़ दिया है। राहुल गांधी के इस बयान के निहितार्थ को समझाने के लिए मोदी सरकार के हालिया निर्णय ही पर्याप्त है।अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरक्षण के मौजूदा … Read more

भगवान कृष्ण की तरह अपने बच्चो को बनाएं – डा. बी. के. मल्लिक

कल श्री कृष्ण जन्माष्टमी था कई लोग अपने बच्चों को श्री कृष्ण रूप में फोटो को फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर शेयर किया था।  यह बहुत ही अच्छी बात है और सभी को अच्छा लगना चाहिए, लेकिन जरूरत है अपने बच्चों को अच्छे संस्कार की देने की। आज के समय में सभी माता-पिता अपने … Read more

महिलाओं को हद में रहने की आज़ादी इसका क्रांतिकारी महिलाओं के लिए होना चाहिए — अंकिता सिंह 

आपको कैसा लगेगा जब आपको अपनी आज़ादी का मतलब बताया जाएगा? मैं वीमेन सेल की एक सदस्य हूँ और एक दिन मीटिंग में ये बताया जाता है कि हमें लड़कियों को ये बताना है कि वो सही से कपड़े पहन के आए। सही से मतलब ऐसे कपड़े जिसमें वो ढकीं रहे, मेरे ख्याल से शायद … Read more

विश्व शांति में भारत की भूमिका— समराज चौहान

आज भारत शांति के हर उस प्रक्रिया में शामिल है जिससे विश्व में शांति एवं समृद्धि आए।भारत की नीति हमेशा से गुटनिर्पेक्षता की रही है।इसलिए आज भारत किसी के दवाब में कार्य नहीं करता बल्कि दूसरों को अपना नीति बदलने के लिए मजबूर कर देता है। भारत हमेशा से कुटनीति,डाॅयलाक और टैबल पर बैठकर बातचीत … Read more

फिल्म संगीत के नींव के पत्थर हैं अनूप बोरलिया– (डॉ.मुकेश कबीर-विनायक फीचर्स)

 किसी फिल्म के बनने में जितना योगदान पर्दे पर दिखने वाले कलाकारों का होता है उससे कहीं अधिक योगदान पर्दे के पीछे काम करने वालों का होता है।ठीक उसी तरह जैसे किसी भवन निर्माण की आंतरिक साज सज्जा तो हमें दिखाई देती है लेकिन नींव के पत्थर और भवन तराशने वाले कारीगरों का योगदान हमें … Read more