हीनयानः तु बोधस्य बोध भाषा विलुप्यते– आनंद शास्त्री

– सम्माननीय मित्रों ! प्रागैतिहासिक तथ्यों के आधार पर हिन्द महासागर से सुदूर देश और सभ्यताओं में जनवरी और फरवरी के मास नहीं थे ! उनमें अधिकांशतः ने भचक्र के अनुसार ! अवकहणा चक्रानुसार ! द्वादश राशियों की सूर्य संक्रांति अनुसार ! भारतीय वाङ्गमय के विद्वानों से परामर्श किया ! एवं आकाश अर्थात अम्बर के … Read more

असंख्य रोज़गार हैं हिन्दी में डॉ.सूर्यबोस,श्रीरागम

  भारत एक महान एवं विशाल देश है |इसमें अनेक राज्य है |विभिन्न राज्यों की विभिन्न भाषाएँ हैं ; किन्तु जो भाषा सम्पूर्ण राष्ट्र को एक स्नेह सूत्र में बांधती है वह हिंदी ही है| फादर कामिल बुल्के ने हिंदी भाषा को लेकर कहा था कि –“ संसार की कोई भी भाषा ऐसी नहीं है … Read more

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया: भारत में प्रगति के वास्तुकार– डॉ प्रग्नेश परमार

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया, एक प्रख्यात भारतीय इंजीनियर और राजनेता, पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के प्रतीक के रूप में खड़े हैं और आधुनिक भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। 15 सितंबर,1861 को कर्नाटक के एक छोटे से गांव मुद्देनहल्ली में जन्मे विश्वेश्वरैया का जीवन उनकी असाधारण बुद्धि, नवीन सोच और राष्ट्र निर्माण के प्रति … Read more

विश्वगुरु के पद से विभूषित-दिवस का स्मरण– डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’

हमारी मातृ-भूमि पर ऐसे अनेक व्यक्तियों का जन्म हुआ है, जिन्हें ईश्वर का अवतार माना गया। ऐसे महान पुरुषों में विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न स्वामी विवेकानन्द है। ये हमारी भारतीय संस्कृति के उन्नायक हैं। आज से सपाद-शताब्दी वर्ष पूर्व 11 सितम्वर, 1893 ई. को विश्वधर्म परिषद्- शिकागो में आंग्लों से गुलाम होते हुए भी उन्होंने भारतीय … Read more

75 वर्षों में हिंदी का उत्कर्ष – सुश्री अरुण कमल

धीरे-धीरे  कदम  बढ़ाती,  पग-पग  बढ़ती  जाती हिंदी विश्व पटल पर, अपने बल पर, देखो अपनी लहराती हिंदी! सहिष्णुता और धैर्य, भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विरासत है। समय के साथ परिवर्तन अवश्यंभावी है। हम परिवर्तनों के लिए सदा तैयार रहते हैं और आज के समय में अल्पकालिक परिवर्तम भी बड़े दीर्घकालिक प्रभाव वाले होते हैं। … Read more

हिंदी का वैश्वीकरण/  हिंदी की विश्व यात्रा– सुनीता पाहूजा

भारतीय आर्यभाषा परिवार की प्रमुख, प्राचीन और ऐतिहासिक भाषा हिंदी अनेक अवस्थाओं से गुज़रते हुए सदैव विकासशील रही है। विविधतापूर्ण विशाल भारत के विभिन्न हिस्सों में बसे अधिकांश भारतीयों के बीच संपर्क भाषा की भूमिका निभाने वाली हिंदी विश्व के विभिन्न देशों में बसे भारतीयों और प्रवासी भारतीयों को भी परस्पर जोड़ने वाली और उन्हें … Read more

तकनीक से खुल रहे हैं हिन्दी के लिये नये द्वार –डॉ.राजीव कुमार रावत

हिंदी भारत की सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जिसकी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत है। यह एक ऐसी भाषा है जो सदियों से विकसित होती रही है, अपने में विभिन्न प्रभावों को समाहित करते हुए, और आज भी यह अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। हिंदी भाषा, जो … Read more

भारतीय भाषाओं के उन्नयन और समन्वय के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित भारतीय भाषा समिति द्वारा किए जा रहे सार्थक प्रयास

हमारे विशेष प्रतिनिधि दिलीप कुमार जी ने पिछले दिनों दिल्ली प्रवास के दौरान भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की, उनसे बातचीत के आधार पर जो जानकारी प्राप्त हुई, उसका सारांश प्रस्तुत है: कौन है आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री: आचार्य चमू कृष्ण शास्त्री भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष हैं। आप एक … Read more

विश्वगुरु के पद से विभूषित-दिवस का स्मरण — डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’

  हमारी मातृ-भूमि पर ऐसे अनेक व्यक्तियों का जन्म हुआ है, जिन्हें ईश्वर का अवतार माना गया। ऐसे महान पुरुषों में विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न स्वामी विवेकानन्द है। ये हमारी भारतीय संस्कृति के उन्नायक हैं। आज से सपाद-शताब्दी वर्ष पूर्व 11 सितम्वर, 1893 ई. को विश्वधर्म परिषद्- शिकागो में आंग्लों से गुलाम होते हुए भी उन्होंने … Read more

“राजभाषा हिन्दी के 75 वर्ष… मंज़िलें अभी बाकी हैं…”–डॉ इन्दु गुप्ता

सृष्टि के आरम्भ से ही मनुष्य को स्वयं को अभिव्यक्त करने की आवश्यकता रही है; निश्चित ही भाषा की उसमें महत्वपूर्ण भूमिका भी रही होगी। दुनिया-भर में हमारी संस्कृति हमारी समृद्ध परम्परा और हमारे गुरूत्व का प्रचार प्रसार करने का श्रेय जिसे जाता है वह है हमारी भाषा हिन्दी। संस्कृत की ज्येष्ठा-आत्मजा है हिन्दी। जैसे … Read more