कल अतीत है, कल भविष्य है लेकिन आज एक उपहार है

किसी कवि ने समय के बारे में क्या खूब कहा है -‘समय-समय की वार्ता, समय-समय का फेर। समय लगा दे ठाठ-बाट, जाते न लागे देर।’ इसलिए जीवन में मनुष्य को यह चाहिए कि वह सदैव समय की कद्र करे। मनुष्य जीवन में समय का बहुत बड़ा महत्व है। रविन्द्र नाथ टैगोर जी ने समय के … Read more

कन्यादान शास्त्रों द्वारा प्रदत्त नाम है जो हिंदुओं में काफी प्रचलित है।

किसी भी मनुष्य का दान करने एवं ऐसा दान लेने का अधिकार किसी के पास नहीं है। मनुष्य कोई वस्तु नहीं है जो दान किया जा सकें। लेकिन कन्या दान सबसे पहले प्रजापति दक्ष ने किया था। इसका सपष्ट तात्पर्य है कि पिता अपनी बेटी को ऐसे युवक के सुरक्षित हाथों में सौंपकर अपने सर्वाधिकार … Read more

मानवता के लिए सार्थक बने मानवाधिकार दिवस — रमेश सर्राफ धमोरा

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसम्बर 1948 को विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर प्रथम बार मानवाधिकार व मानव की बुनियादी मुक्ति पर घोषणा की थी। वर्ष 1950 में संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष की 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाना तय किया था। 73 वर्ष पहले पारित हुआ विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र एक … Read more

नये आयामों को जाग्रत करेगा-‘अंतरराष्ट्रीय विश्व ध्यान दिवस।’- सुनील महाला

भारत निरंतर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ रहा है। योग हो या ध्यान, भारत ने युगों-युगों से विश्व को ऐसा कुछ दिया है, जो शायद ही विश्व के किसी अन्य देश ने संपूर्ण विश्व को दिया हो। शायद इसीलिए भारत को विश्व गुरू की संज्ञा दी जाती रही है। यह बहुत ही हर्ष और … Read more

बोझ नहीं; समाज और देश के लिए अमूल्य निधि और धरोहर हैं बुजुर्ग। – सुनील कुमार महला

पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के कारण भारतीय सामाजिक परिवेश में अनेक आमूलचूल परिवर्तन आए हैं। आज हमारे सामाजिक, नैतिक मूल्य बदल गये हैं। हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार आज शनै:शनै: पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के रंग में रंग रहे हैं। आधुनिकता का रंग हम सभी पर आज हावी हो गया है। समय,काल और परिस्थितियों के अनुसार आज … Read more

मिट्टी की कोख में, अनेक रत्नों का भंडार है- सुनील महला

‘कीचड़’ शब्द सुनते ही हर किसी को एक अजीब सिहरन-सी उठने लगती है। कीचड़-मिट्टी के नाम पर हम सभी अपने मुंह को बिचकाने लगते हैं।कीचड़ हो या मिट्टी, कोई भी इनसे दूर ही रहना चाहते हैं। काफ़ी समय पहले, शायद अब भी टीवी पर विचार हम सभी ने देखा है -‘दाग अच्छे हैं।’ मतलब-‘ स्टेन्स … Read more

‘बंटेंगे तो कटेंगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ के निहितार्थ  -राधा रमण 

इस में दो राय नहीं हो सकती कि महाराष्ट्र में महायुति (भाजपा, शिवसेना और एनसीपी) की प्रचंड जीत में कई अन्य कारणों के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक नारे ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सियासी तीर ‘एक हैं तो सेफ हैं’ की अहम् भूमिका रही। दोनों शीर्ष नेताओं … Read more

अशोक वाटिका और मधुवन — अशोक वर्मा

संत तुलसी दास जो कुल श्री रामचरित मानस बहुत ज्यादा पठित एवं चर्चित पंचम सोपान सुंदरकाण्ड पढ़ते सुनते एक समय मेरे मन में एक जिज्ञासा हुई, वह है दो बार फल के काम से फल खाने का जिक्र किया गया है। दो जगहों पर एक लंका के अशोक वाटिका में, दूसरा मधुवन में, जिसका अधिकारी … Read more

भारतीय संस्कृति का प्रतीक है महाकुंभ मेला -डॉ. सौरभ मालवीय

महाकुंभ मेला भारत की गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है। यह देश की सांस्कृतिक धरोहर है। यह मेला हमारी गौरवमयी संस्कृति का संवाहक है। यह भारत की आध्यात्मिक शक्ति एवं आस्था को दर्शाता है। यह कला-संस्कृति, गायन, नृत्य, हस्तकला को प्रोत्साहित करता है। इस मेले में संपूर्ण भारत की झलक मिलती है। इसमें प्राचीन भारत के … Read more

इस बार खास होगा दिल्ली विधानसभा चुनाव — मनोज कुमार मिश्र

देश में होने वाला हर चुनाव खास ही होता है लेकिन महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के करीब दो महीने बाद होने वाला दिल्ली विधानसभा का चुनाव ज्यादा ही खास होने वाला है। हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे ने देश और खास कर दिल्ली का राजनीतिक समीकरण काफी बदल दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में … Read more