नो डिटेंशन पॉलिसी के खात्मे से शिक्षा में होगा सुधार ! — सुनील कुमार महला

हाल ही में केंद्र सरकार (शिक्षा मंत्रालय) ने ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है जिसके तहत अब कक्षा 5 और 8 की वार्षिक परीक्षा में असफल छात्रों को फेल किया जाएगा, यह वाकई एक स्वागत योग्य कदम है। वास्तव में, केंद्र सरकार के इस फैसले से बच्चों के अंदर सीखने की इच्छा और … Read more

मनमोहन का स्मारक तो सही, नरसिंह राव का कब बनेगा — जितेंद्र तिवारी

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का शनिवार दोपहर दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ। डॉ. मनमोहन सिंह को जिस भव्यता के साथ विदा किया गया, वे वास्तव में उसके अधिकारी थे। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल वरिष्ठ सहयोगी राजनाथ सिंह … Read more

सादा जीवन, उच्च विचार’ के प्रतीक थे मनमोहन सिंह  -राधा रमण 

मृत्यु किसी की अच्छी नहीं मानी जाती। लेकिन मृत्यु तय है। तभी तो कहा जाता है कि रामनाम सत्य है, सत्य है तो मुक्ति है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे। गुरूवार को देर रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका निधन हो गया। वे 92 साल 3 महीना के थे। बिटिश … Read more

“नदी जोड़ो परियोजना से खुलेंगे समृद्धि और खुशहाली के रास्ते !”– सुनील कुमार महला

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100 वीं जयंती पर हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा मध्यप्रदेश में खजुराहो में केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की आधारशिला रखी गई, इसके साथ ही वाजपेयी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट की देश में शुरूआत हो गई। गौरतलब है कि केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना … Read more

“तस्करी के लिए हाइटेक ड्रोन्स और तकनीक का इस्तेमाल कर रहा पाकिस्तान।”– सुनील कुमार महला,

सभी जानते हैं कि पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का गढ़ है। पाकिस्तान न केवल आज दुनिया में आतंकवाद फैला रहा है बल्कि वह स्वयं भी इससे बहुत त्रस्त है। हाल ही में उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक सुरक्षा चौकी पर बड़ा आतंकवादी हमला हुआ, मीडिया के हवाले से खबरें आईं हैं कि … Read more

जैन समाज की उभरती साहित्यकार सुषमा पारख: कृष्ण भक्ति और साहित्य साधना का अद्भुत संगम

शिलचर के प्रतिष्ठित साधुमार्गी जैन परिवार की बहू सुषमा पारख न केवल एक शिक्षित, संस्कारी और मिलनसार महिला हैं, बल्कि वे एक उभरती हुई साहित्य साधिका के रूप में भी पहचानी जा रही हैं। अपने दांपत्य जीवन को सफलतापूर्वक निभाते हुए, उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी पहली काव्य संग्रह … Read more

प्राकृतिक खेती के लिए राष्ट्रीय मिशन !

आज भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व धीरे-धीरे एक बार पुनः रसायन मुक्त प्राकृतिक और परंपरागत खेती की ओर बढ़ रहा है। भारत सदियों सदियों से विश्व का एक बड़ा कृषि प्रधान देश रहा है और आज भी है और यहां प्राकृतिक खेती होती रही है। कहना ग़लत नहीं होगा कि हरित क्रांति से पहले भारत … Read more

पाकिस्तान की राह पर क्यों जा रहा बांग्लादेश? – राधा रमण 

बीते कुछ वर्षों से ऐसा आखिर क्या हो गया कि बांग्लादेश से हमारे संबंधों में कटुता आ गई। खेदजनक बात यह कि यह वही बांग्लादेश है जिसे करीब 53 साल पहले तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से अलग करके बनाया था। इसके लिए 13 दिनों तक घनघोर युद्ध हुआ था। बांग्लादेश को बनाने … Read more

कोई बताए कि ‘एक देश एक चुनाव’ में क्या कमी है — आर.के. सिन्हा

‘एक देश एक चुनाव’ के सपने को साकार करने की तरफ देश बढ़ रहा है। लगातार चुनाव देश की प्रगति में बाधा बन रहे हैं। भारत में ‘एक देश-एक चुनाव’ का विचार ऐसा विषय है जिस पर अलग-अलग लोगों की बंटी हुई राय है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे देश को कई फायदे … Read more

स्कॉटलैंड के राजकाज में हिंदी- उमेश चतुर्वेदी

इसे विडंबना ही कहेंगे कि अब भी राजभाषा का दर्जा हासिल होने के बावजूद अपनी हिंदी गैर हिंदीभाषी क्षेत्रों में राजनीतिक विरोध का जरिया है। संसद के मौजूदा शीत सत्र में पारित ‘भारतीय वायुयान विधेयक’ के विरोध में गैरहिंदीभाषी सांसद मुखर हो गए थे, क्योंकि विधेयक का नाम हिंदी में है। ऐसे माहौल में सात … Read more