मंडल आयोग : अधिकांश सिफारिशें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं

– ई0 प्रभात किशोर भारत का संविधान अपने नागरिकों को समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है, परन्तु सामाजिक भेदभाव के कारण, समाज के एक बड़े वर्ग का सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में अल्प प्रतिनिधित्व है। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करने के लिए जनता पार्टी सरकार के द्वारा 1 जनवरी 1979 को श्री बी.पी. मंडल की अध्यक्षता में द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना की गई थी। आयोग ने 31 दिसंबर 1980 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, परन्तु यह कांग्रेस शासन के पूरे एक दशक तक ठंढे बस्ते में पड़ी रही। सन 1989 में जब जनता दल सरकार सत्ता में आई, तो 13 अगस्त 1990 को केंद्र सरकार और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की सेवाओं में पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना जारी की गई। रिपोर्ट से उल्लिखित है कि “हिंदू और गैर-हिंदू दोनों श्रेणी के पिछडे वर्ग की जनसंख्या  भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 52 प्रतिशत है। तदनुसार, केंद्र सरकार के तहत सभी पदों में से 52 प्रतिशत का यथानुपात आरक्षण उनके लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। परन्तु यह प्रावधान उच्चतम न्यायालय के उन निर्णयों के विरूद्ध होगा, जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत आरक्षण की कुल मात्रा 50 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। इसे देखते हुए, पिछडे वर्गों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की सीमा इस प्रकार निर्धारित की जाय कि अनु0 जाति एवं जनजाति के लिए प्रावधानित आरक्षण 22.5 प्रतिशत में जोड़ने पर वह 50 प्रतिशत से नीचे रहे। इन कानूनी बाधाओं को देखते हुए, आयोग ने केवल 27 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा की, भले ही उनकी जनसंख्या प्रावधानित अनुशंसा से दोगुनी हो। जिन राज्यों ने पहले ही ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षण लागू कर दिया है, वे इस अनुशंसा से अप्रभावित रहेंगे।‘‘ न्यायालय के द्वारा 50 प्रतिशत सीलिंग की कानूनी बाध्यता के कारण आयोग द्वारा पिछड़े वर्ग के लिए मात्र 27 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा की गई है, अन्यथा यह अनुशंसा जनसंख्या अनुपात के अनुसार यानी 52 प्रतिशत होती। अगड़़ी जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान के लिए वर्ष 2019 में, 103वें संविधान संशोधन के माध्यम से सीमा को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यही प्रक्रिया पिछड़े वर्गों को भी महज 27 प्रतिशत के स्थान पर 52 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए की जानी चाहिए थी, लेकिन खंडित दबे-कुचले तबके कभी भी सरकारों की प्राथमिकता सूची में नहीं रहे । जनता दल एवं बाद की अन्य दलों की केंद्र सरकारों ने मंडल आयोग की सभी अनुशंसाओं  को लागू नहीं किया । आयोग की अनुशंसायें केवल सरकारी सेवाओं (जो जनसंख्या के 1 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं) के लिए नहीं हैं बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए है, ताकि एक निश्चित अवधि के बाद सभी नागरिक एक ही बेंच मार्क पर खड़े हो सकें। अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के द्वारा निम्नलिखित योजनाओं की अनुशंसा की गई है, जिनका क्रियान्वयन अभी प्रतीक्षित है:- (1) एक खुली प्रतियोगिता में गुणागुण आधार पर नियोजित पिछडे वर्ग के उम्मीदवारों को उनके 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा में समायोजित नहीं किया जाना चाहिए। (2) उपरोक्त आरक्षण को सभी स्तरों पर पदोन्नति में भी लागू किया जाना चाहिए। (3) आरक्षित कोटा जो भरा नहीं गया है उसे तीन साल की अवधि के लिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए और उसके बाद अनारक्षित किया जाना चाहिए। (4) सीधी भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा में छूट ओबीसी के उम्मीदवारों को उसी तरह दी जानी चाहिए जैसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मामले में दी जाती है। (5) संबंधित प्राधिकारियों द्वारा प्रत्येक श्रेणी के पदों के लिए रोस्टर प्रणाली उसी प्रकार से अपनाई जानी चाहिए जैसे वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के संबंध में अपनाई जाती है। (6) आरक्षण की उपरोक्त योजना केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के लिए भी सभी भर्तियों पर लागू होनी चाहिए। (7) सभी निजी क्षेत्र के उपक्रम जिन्हें सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है, उन्हें उपरोक्त आधार पर कर्मियों की भर्ती करनी चाहिए। (8) सभी विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों को भी उपरोक्त आरक्षण योजना के अंतर्गत शामिल किया जाना चाहिए। शैक्षिक रियायतें:- चयनात्मक आधार पर शुरू किया गया प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम और आवासीय विद्यालय पूरे समुदाय की चेतना के बढ़ते बिंदुओं के रूप में कार्य करेंगे। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यवसायिक संस्थानों में पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए 27 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जानी चाहिए। वे राज्य, जिन्होंने पहले ही इनके लिए 27 प्रतिशत से अधिक सीटें आरक्षित कर रखी हैं, वे इन अनुशंसाओं से अप्रभावित रहेंगे। हमारे तकनीकी और पेशेवर संस्थानों में ऐसे सभी छात्रों के लिए विशेष कोचिंग सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि ये युवा निराश और अपमानित महसूस न करें और साथ ही देश में अकुशल और घटिया इंजीनियरों, डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों के साथ देश न उतरे। वित्तीय सहायता: – व्यवसायिक समुदायों (जैसे ग्रामीण कुम्हार, तेल कोल्हू, लोहार, बढ़ई आदि) के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए अलग-अलग वित्तीय संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए। संरचनात्मक परिवर्तन:- सभी राज्य सरकारों को प्रगतिशील भूमि कानून बनाने और लागू करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण इलाकों में मौजूदा उत्पादन संबंधों में बुनियादी संरचनात्मक परिवर्तन किए जा सकें। वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को अधिशेष भूमि आवंटित की जा रही है। भूमि हदबंदी कानूनों आदि के लागू होने के परिणामस्वरूप भविष्य में उपलब्ध होने वाली अतिरिक्त भूमि का एक हिस्सा भी अन्य पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन श्रमिकों को आवंटित किया जाना चाहिए। मिश्रित: – (1) व्यावसायिक समुदायों के कुछ वर्ग जैसे मछुआरे, बंजारे, खटवे, बाँसफोर आदि, जो अभी भी अस्पृश्यता से पीड़ित हैं, को अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जा सकता है। (2) पिछड़ा वर्ग विकास निगमों को उनकी उन्नति के लिए विभिन्न सामाजिक-शैक्षिक और आर्थिक उपायों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्थापित किया जाना चाहिए। (3) पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्यों में एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए। (4) अत्यंत पिछड़े वर्गों यथा- हिमाचल प्रदेश में गद्दी, महाराष्ट्र में नव-बौद्ध, तटीय क्षेत्रों में मछुआरे, जम्मू एवं कश्मीर में गुर्जरों को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए, परिसीमन के दौरान उनकी सघनता वाले क्षेत्रों को अलग निर्वाचन क्षेत्र बनाया जाना चाहिए। केन्द्रीय सहायता:- राज्य सरकार द्वारा सभी विकास कार्यक्रमों, विशेष रूप से पिछड़े वर्गों के लिए, केंद्र सरकार द्वारा उसी तरह और उसी सीमा तक वित्तपोषित किया जाना चाहिए जैसा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मामले में किया जाता है। पूरी योजना को केवल बीस साल (यानी एक पीढ़ी की अवधि) के बाद संशोधित किया जाना चाहिए। कम अंतराल पर कोई समीक्षा पिछडे वर्ग की वर्तमान स्थिति और जीवन शैली पर अनुशंसाओं के प्रभाव का उचित आकलन संभव नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट 1931 की पिछली जनगणना के यथानुपात आधारित थी। 2021 के बाद की आगामी जनगणना में जातिवार सर्वेक्षण और पिछडे वर्गों को उनकी जनसंख्या के … Read more

कवि रवि प्रताप सिंह रायबरेली में हुए सम्मानित

कोलकाता/रायबरेली:15 जुलाई, 2026 बैसवारा की साहित्यिक परंपरा, सांस्कृतिक अस्मिता और रचनात्मक चेतना का अद्भुत दृश्य उस समय देखने को मिला, जब नवगीत के श्लाका पुरुष डॉ. शिवबहादुर सिंह भदौरिया की जयंती पर लालगंज में आयोजित अलंकरण समारोह, काव्यांजलि एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम साहित्य का महाकुंभ बन गया। यह आयोजन केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि … Read more

राज्यसभा उपचुनाव: भाजपा उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन, सुष्मिता देव बोलीं— ‘भाजपा मेरा परिवार है’

कोलकाता, 15 जुलाई। राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा की ओर से घोषित तीनों उम्मीदवार—सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक—ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं मंत्री मौजूद रहे। नामांकन … Read more

विश्व हिंदू परिषद के परिषद शिक्षा वर्ग का भव्य समापन

अगरतला, 15 जुलाई: विश्व हिंदू परिषद दक्षिण पूर्व एवं त्रिपुरा प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परिषद शिक्षा वर्ग का समापन समारोह पश्चिम त्रिपुरा जिले स्थित सेवा धाम प्रकल्प में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में बड़ी संख्या में परिषद पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री नरेश चंद्र … Read more

महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में निवेश के लिए चिली ने भारतीय निवेशकों को दिया आमंत्रण

– रत्नज्योति दत्ता – नई दिल्ली: लैटिन अमेरिकी देश चिली ने भारतीय निवेशकों को अपने महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) खनिज क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक निवेश अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया है। यह जानकारी भारत में चिली के राजदूत जुआन एंगुलो ने दी। वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के क्षेत्र में चिली की रणनीतिक स्थिति है। कई ऐसे खनिज हैं जिनके वैश्विक उत्पादन और भंडार में उसकी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। “चिली भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक विश्वसनीय और रणनीतिक साझेदार बनना चाहता है। हम भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव तथा उसकी अर्थव्यवस्था के डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में योगदान देना चाहते हैं,” कहा जुआन एंगुलो, भारत में चिली के राजदूत, ने 13 जुलाई को फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसी) में आयोजित एक मीडिया संवाद के दौरान। भारत स्थित चिली दूतावास के अनुसार, चिली दुनिया के कुल तांबा (कॉपर) उत्पादन का 22 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जबकि उसके पास वैश्विक तांबा भंडार का 21 प्रतिशत है। लिथियम के मामले में चिली का वैश्विक उत्पादन में 21 प्रतिशत योगदान है और उसके पास दुनिया के कुल लिथियम भंडार का 30 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा, देश में मोलिब्डेनम, कोबाल्ट, रेनियम और आयोडीन जैसे खनिजों के भी प्रचुर भंडार हैं। “स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी प्रगति और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार के कारण पिछले एक दशक में इन खनिजों का वैश्विक महत्व लगातार बढ़ा है,” एंगुलो ने कहा। भारत और चिली के बीच 77 वर्षों से चले आ रहे राजनयिक संबंधों का उल्लेख करते हुए एंगुलो ने कहा कि चिली चाहता है कि भारतीय निवेशक देश के खनन क्षेत्र में एक सदी से अधिक के अनुभव का लाभ उठाते हुए उसके महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में निवेश करें। उन्होंने कहा कि भारत और चिली के बीच लागू दोहरा कराधान परिहार समझौते का लाभ भी भारतीय निवेशकों को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां चिली को विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र के रूप में विकसित कर वहां के व्यापक वैश्विक व्यापार नेटवर्क का लाभ उठाते हुए नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट का उल्लेख करते हुए राजदूत ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ी है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। इसका असर चिली सहित अन्य लैटिन अमेरिकी देशों पर भी पड़ रहा है, उन्होंने कहा।

शब्दवीणा सृजन त्रिविधा में गया, पटना एवं दिल्ली के रचनाकारों ने पढ़ीं रचनाएँ

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक गोष्ठी “शब्दवीणा सृजन त्रिविधा” में पटना से शब्दवीणा के पटना जिला साहित्य मंत्री वरिष्ठ कवि प्रो डॉ सुनील कुमार उपाध्याय, दिल्ली से शब्दवीणा की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ कवयित्री आशा दिनकर एवं गया जी से शब्दवीणा के गया जिला प्रचार मंत्री कवि अजय … Read more

राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस 2026 के मौके पर ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई

[नई दिल्ली से द्रास तक 1,900 km की दूरी तय करने वाला 13-दिन का मोटरसाइकिल अभियान] नई दिल्ली: कारगिल विजय दिवस 2026 के देश भर में मनाए जाने वाले जश्न के हिस्से के तौर पर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में नेशनल वॉर मेमोरियल से एक खास मोटरसाइकिल अभियान, ‘शौर्य विजय … Read more

 खनिज क्षेत्र में निवेश के लिए चिली ने भारतीय निवेशकों को दिया आमंत्रण

– रत्नज्योति दत्ता – 14 जुलाई, 2026 नई दिल्ली: लैटिन अमेरिकी देश चिली ने भारतीय निवेशकों को अपने महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) खनिज क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक निवेश अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया है। यह जानकारी भारत में चिली के राजदूत ने दी। वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ … Read more

पूर्व मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने किया जन संपर्क

गड़वार(बलिया) उत्तर-प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने मंगलवार को गड़वार मंडल के रामपुर भोज, मनियर, हरिपुर, नारायनपाली, कोदई और घोसवती गांवों में जनसंपर्क कर चौपालें आयोजित की।यह अभियान आगामी 12 अगस्त को दिवंगत विनोद राय की पुण्यतिथि के आयोजन को सफल बनाने के उद्देश्य से चलाया गया। पूर्व मंत्री ने विनोद राय के … Read more

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. केशव पांडे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित पुस्तक “सफलता के साक्षी” का भव्य विमोचन

ग्वालियर। वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. केशव पांडे के समाजहित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों, पत्रकारिता में उनके योगदान तथा सामाजिक सरोकारों पर आधारित पुस्तक “सफलता के साक्षी” का भव्य विमोचन आज शीतला सहाय सभागार, कैंसर हॉस्पिटल, ग्वालियर में गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, साहित्यकारों, वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों एवं … Read more