‘अपराजेय’ कोई नहीं, इसलिए जन-हित न भूलिए
‘अपराजेय’ कोई नहीं, इसलिए जन-हित न भूलिए अजय जैन ‘विकल्प’, इंदौर (मप्र) ===== जैसे खेल में बहुत कुछ तय होने पर भी अनेक बार नया इतिहास रचा जाता है, ऐसे ही राजनीति में भी सबका समय आता है और जनादेश किसी को सत्ता देता है, तो किसी के किलों की दीवारें दरक जाती है। … Read more