राष्ट्र-चिंतन श्रम संसार की तस्वीर बदलने वाली जीवंत गारंटी – आचार्य श्रीहरि
श्रमेव जयते। श्रम की प्रधानता अनिवार्य है। श्रम की प्रधानता और समृद्धि के बिना जीवंत राष्ट्र की परिकल्पना नहीं हो सकती है। श्रम की कसौटी पर निर्माण और विकास की परिकल्पना बनती है। इसलिए श्रम की महत्ता और अनिवार्यता को अस्वीकार करना मुश्किल है। इनकी उपेक्षा और इन पर उदासीनता अस्वीकार है। सरकार की ही … Read more