विशेष प्रतिनिधि, धोलाई, 21 अक्टूबर। असम के कछार जिले के धोलाई विधानसभा क्षेत्र के दर्मिखाल उत्तरग्राम की लेखिका, शिक्षिका एवं समाजसेविका सीमा राय ने अपनी साहित्यिक प्रतिभा से क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। कोलकाता में आयोजित साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोह ‘शारद समारोह’ में उन्हें ‘भारत मंत्र सम्मान’ के लिए चयनित किया गया। इसके अलावा, उनकी कविता ‘नए सिरे से शुरू करो’ को अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला-2026 में प्रकाशित ‘शब्दस्तोत्र’ काव्य-संकलन में स्थान मिला है।
कोलकाता के बागबाजार गौड़ीय मठ सभागार में 3 और 4 अक्टूबर को आयोजित ‘शारद समारोह’ बंगाली साहित्य, संस्कृति और कला के संगम का महत्वपूर्ण आयोजन रहा। ‘बार्ता’ और ‘मनन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में ‘मनन प्रकाशन’ के संपादक प्रीतम चक्रवर्ती ने सहयोग दिया। कार्यक्रम में विभिन्न पुस्तकों एवं पत्रिकाओं के विमोचन के साथ 200 से अधिक लेखक-लेखिकाओं की एकल पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। इस अवसर पर साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य उत्कर्ष सम्मान’ तथा विशिष्ट व्यक्तियों को ‘भारत मंत्र सम्मान’ प्रदान किया गया।
सीमा राय को साहित्य-सृजन, लेखन के माध्यम से सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति और समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए ‘भारत मंत्र सम्मान’ हेतु चयनित किया गया। विशेष कारणों से वह समारोह में उपस्थित नहीं हो सकीं। उनकी अनुपस्थिति में समाजसेवी एवं लेखक डॉ. सुराशिस मैती ने सम्मान ‘मनन प्रकाशन’ के संपादक प्रीतम चक्रवर्ती को सौंपा, ताकि इसे सीमा राय तक पहुंचाया जा सके।
इसी बीच, उनकी कविता ‘नए सिरे से शुरू करो’ को ऐकतान प्रकाशनी द्वारा प्रकाशित ‘शब्दस्तोत्र’ काव्य-संकलन में शामिल किया जाना भी उनकी साहित्यिक यात्रा की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस सफलता से दर्मिखाल उत्तरग्राम सहित आसपास के क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों ने उनके घर पर उन्हें पारंपरिक गमछा पहनाकर सम्मानित किया।
सीमा राय ने बताया कि छात्र जीवन से ही उन्हें लेखन में रुचि रही है। उनकी मां उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा थीं। विवाह और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ समय तक लेखन से दूर रहने के बाद उन्होंने पिछले दो वर्षों से फिर नियमित रूप से साहित्य-साधना शुरू की। वर्तमान में एक पुत्र की मां सीमा राय बंगाली, असमिया और हिंदी—तीनों भाषाओं में कविताएं एवं कहानियां लिख रही हैं। उनकी कुछ अन्य रचनाएं, जिनमें अधूरी प्रेम कहानियां और लघुकथाएं शामिल हैं, प्रकाशन की प्रतीक्षा में हैं।
दर्मिखाल के सेवानिवृत्त शिक्षाविद् निहार वैद्य ने सीमा राय की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एक दूरदराज के गांव की गृहिणी का साहित्य के क्षेत्र में इस तरह आगे बढ़ना प्रेरणादायक है। उनकी सफलता नई पीढ़ी के लिए उदाहरण बनेगी। उन्होंने सीमा राय के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर साहित्यिक प्रगति की कामना की।
सीमा राय की इन उपलब्धियों ने साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और साहित्य के प्रति समर्पण से सीमित संसाधनों के बीच भी नई पहचान बनाई जा सकती है। उनकी सफलता से पूरे क्षेत्र में गर्व और उत्साह का वातावरण है।कोलकाता के ‘शारद समारोह’ में सीमा राय को ‘भारत मंत्र सम्मान’, कविता भी प्रतिष्ठित काव्य-संकलन में शामिल
विशेष प्रतिनिधि, धोलाई, 21 अक्टूबर। असम के कछार जिले के धोलाई विधानसभा क्षेत्र के दर्मिखाल उत्तरग्राम की लेखिका, शिक्षिका एवं समाजसेविका सीमा राय ने अपनी साहित्यिक प्रतिभा से क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। कोलकाता में आयोजित साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोह ‘शारद समारोह’ में उन्हें ‘भारत मंत्र सम्मान’ के लिए चयनित किया गया। इसके अलावा, उनकी कविता ‘नए सिरे से शुरू करो’ को अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेला-2026 में प्रकाशित ‘शब्दस्तोत्र’ काव्य-संकलन में स्थान मिला है।
कोलकाता के बागबाजार गौड़ीय मठ सभागार में 3 और 4 अक्टूबर को आयोजित ‘शारद समारोह’ बंगाली साहित्य, संस्कृति और कला के संगम का महत्वपूर्ण आयोजन रहा। ‘बार्ता’ और ‘मनन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में ‘मनन प्रकाशन’ के संपादक प्रीतम चक्रवर्ती ने सहयोग दिया। कार्यक्रम में विभिन्न पुस्तकों एवं पत्रिकाओं के विमोचन के साथ 200 से अधिक लेखक-लेखिकाओं की एकल पुस्तकों का प्रकाशन किया गया। इस अवसर पर साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य उत्कर्ष सम्मान’ तथा विशिष्ट व्यक्तियों को ‘भारत मंत्र सम्मान’ प्रदान किया गया।
सीमा राय को साहित्य-सृजन, लेखन के माध्यम से सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति और समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए ‘भारत मंत्र सम्मान’ हेतु चयनित किया गया। विशेष कारणों से वह समारोह में उपस्थित नहीं हो सकीं। उनकी अनुपस्थिति में समाजसेवी एवं लेखक डॉ. सुराशिस मैती ने सम्मान ‘मनन प्रकाशन’ के संपादक प्रीतम चक्रवर्ती को सौंपा, ताकि इसे सीमा राय तक पहुंचाया जा सके।
इसी बीच, उनकी कविता ‘नए सिरे से शुरू करो’ को ऐकतान प्रकाशनी द्वारा प्रकाशित ‘शब्दस्तोत्र’ काव्य-संकलन में शामिल किया जाना भी उनकी साहित्यिक यात्रा की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इस सफलता से दर्मिखाल उत्तरग्राम सहित आसपास के क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों ने उनके घर पर उन्हें पारंपरिक गमछा पहनाकर सम्मानित किया।
सीमा राय ने बताया कि छात्र जीवन से ही उन्हें लेखन में रुचि रही है। उनकी मां उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा थीं। विवाह और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ समय तक लेखन से दूर रहने के बाद उन्होंने पिछले दो वर्षों से फिर नियमित रूप से साहित्य-साधना शुरू की। वर्तमान में एक पुत्र की मां सीमा राय बंगाली, असमिया और हिंदी—तीनों भाषाओं में कविताएं एवं कहानियां लिख रही हैं। उनकी कुछ अन्य रचनाएं, जिनमें अधूरी प्रेम कहानियां और लघुकथाएं शामिल हैं, प्रकाशन की प्रतीक्षा में हैं।
दर्मिखाल के सेवानिवृत्त शिक्षाविद् निहार वैद्य ने सीमा राय की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एक दूरदराज के गांव की गृहिणी का साहित्य के क्षेत्र में इस तरह आगे बढ़ना प्रेरणादायक है। उनकी सफलता नई पीढ़ी के लिए उदाहरण बनेगी। उन्होंने सीमा राय के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर साहित्यिक प्रगति की कामना की।
सीमा राय की इन उपलब्धियों ने साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और साहित्य के प्रति समर्पण से सीमित संसाधनों के बीच भी नई पहचान बनाई जा सकती है। उनकी सफलता से पूरे क्षेत्र में गर्व और उत्साह का वातावरण है।