शिलचर, 20 अक्टूबर। लगभग 180 वर्षों की पारिवारिक परंपरा और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए इस वर्ष भी शिलचर के अंबिकापट्टी में पाल चौधरी परिवार की दुर्गापूजा आयोजित की जा रही है। समय के साथ पूजा का स्थान भले ही बदल गया हो, लेकिन परिवार की आस्था, श्रद्धा और प्राचीन परंपराएं आज भी अक्षुण्ण हैं।
जानकारी के अनुसार, लगभग 180 वर्ष पहले प्रणब पाल चौधरी के दादाजी स्वर्गीय ईशान पाल चौधरी ने अविभाजित भारत के वर्तमान बांग्लादेश क्षेत्र में इस पारिवारिक दुर्गापूजा की शुरुआत की थी। बाद में परिवार के मूल निवास से यह पूजा शिलचर पहुंची। पिछले लगभग 38 वर्षों से परिवार के सदस्य शिलचर में एकजुट होकर इस दुर्गापूजा का आयोजन कर रहे हैं।
हर वर्ष पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक नियमों के अनुसार पूजा के सभी अनुष्ठान पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ संपन्न किए जाते हैं। महाष्टमी और महानवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया जाता है। परिवार की वर्तमान पीढ़ी भी पूर्वजों की परंपरा को अक्षुण्ण रखते हुए इस विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है।
दुर्गोत्सव के शुभ अवसर पर प्रणब पाल चौधरी ने समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। 180 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को संजोए पाल चौधरी परिवार की यह दुर्गापूजा आज भी शिलचर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है।