तालियों का उत्साह  (लघु कथा)

माता – पिता के लाख समझाने, बुझाने, धमकाने के बाद भी मोहन  पढ़ने का नाम ही नही ले रहा था यहां तक कि स्कूल जाने मे भी आनाकानी करता। बदलते युग मे पढ़ाई के बिना मोहन का भविष्य क्या होगा? इसके लिए माता -पिता बड़े चिंता मे रहते थे। मोहन दिन भर कंचा( काच का गोली) नही तो दौड़-धूप खेलता रहता। शिक्षा कितना महत्वपूर्ण है इसकी ज्ञान उसके अंदर अभी नही आया था। जैसे – तैसे श्रेणी उत्तीर्ण हो जाता। एक बार प्रति वर्ष की तरह वार्षिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने के लिए विद्यालय परिसर मे सभा का आयोजन हुआ जिसमें सभी शिक्षक – शिक्षिका, विधायक महोदय तथा विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। प्रधानाध्यापक महोदय ने प्रत्येक श्रेणी मे प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों के नाम एक – एक कर घोषणा की तथा उक्त छात्रों ने खड़े होकर नमस्कार किया और उपस्थित विधायक सहित सभी गणमान्य लोगों ने जोरदार तालियां बजाकर उक्त छात्रों की अभिनंदन करते हुए  उत्साह बढ़ाया। तालियों भरा अभिनंदन देखकर मोहन का मन बदला। जो काम माता – पिता, शिक्षक नही कर पाए वो काम लोगों के तालियों ने कर दिया। मोहन मन ही मन सोचा, काश! मै भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होता तो लोग मुझे भी तालियों से स्वागत व अभिनंदन करते! फिर उसके अंदर पढ़ाई के प्रति ऐसा उत्साह जगा कि वह खुब मन लगाकर पढ़ने लगा और प्रति श्रेणी मे प्रथम, द्वितीय स्थान प्राप्त कर तालियों भरा अभिनंदन पाने लगा। सभी शिक्षक, विधायक सहित गणमान्य लोगों ने मोहन को प्रेरणा के स्रौत के तौर पर पेश करने लगे। अंत में मोहन पढ़ लिखकर सरकारी शिक्षक की नौकरी प्राप्त कर लिया।

पवन कुमार शर्मा (शिक्षक)

साहित्यकार व पूर्व पत्रकार 

दुमदुमा (असम)

मो.नं.9954327677

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