चलताकांदी में नेत्र जांच शिविर आयोजित

शिलचर। गत 23 सितंबर, बुधवार को उधारबंद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत चैलताकांदी में एक नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया।

सक्षम के উদ্যোগ तथा रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी द्वारा संचालित श्रीमा सारदा कोचिंग सेंटर के छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों के लिए आयोजित इस शिविर में करीब 50 छात्र-छात्राओं और 20 अभिभावकों की आंखों की जांच की गई। जांच के बाद आवश्यकता के अनुसार उन्हें तत्काल चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाओं की पर्ची भी दी गई।

जांच शुरू होने से पहले रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी के संयुक्त सचिव यादव साहा ने आंखों की देखभाल और दृष्टि की सुरक्षा को लेकर जागरूकता संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आंखों को स्वस्थ रखने के लिए दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों के साथ पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है। विशेष रूप से विटामिन ‘ए’ से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे गाजर, शकरकंद, संतरा, नींबू तथा विभिन्न हरी सब्जियां और फल आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों-किशोरों के साथ बड़ों को भी लंबे समय तक कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग करना पड़ता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए समय-समय पर स्क्रीन से नजर हटाकर आंखों को आराम देना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

शिविर में जिन छात्र-छात्राओं और अभिभावकों में आंखों से संबंधित समस्याएं पाई गईं, उन्हें आगे के उपचार के लिए शिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा कराने की सलाह दी गई। दूरदराज के क्षेत्र में लोगों तक प्राथमिक नेत्र जांच और चिकित्सा परामर्श पहुंचाने की इस पहल को छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से अच्छा प्रतिसाद मिला।

शिविर में सक्षम द्वारा संचालित संत सूरदास आई केयर सेंटर की नेत्र परीक्षक नीता राभा और रिया पाल ने सेवाएं प्रदान कीं। रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी के सदस्य निर्मल कांति राय ने सहयोग किया। सभी के प्रयास और सेवाभाव से शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग के लिए रामकृष्ण विवेकानंद सोसाइटी के सदस्य अपू रंजन देव ने सभी छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, चिकित्सा कर्मियों एवं संबंधित व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह नेत्र जांच शिविर केवल प्राथमिक नेत्र जांच और चिकित्सा परामर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों में आंखों की देखभाल और स्वस्थ दृष्टि बनाए रखने के प्रति जागरूकता पैदा करने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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