हाफलोंग, 11 सितंबर। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों को ब्रांडिंग, विपणन, डिजिटल कौशल तथा निर्यात क्षमता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शुक्रवार को हाफलोंग स्थित कल्चरल इंस्टीट्यूट हॉल में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एमएसएमई-डेवलपमेंट एंड फैसिलिटेशन ऑफिस (DFO), शिलचर की ओर से केशव स्मारक संस्कृति सुरभि तथा संबंधित भागीदार एवं कार्यान्वयन संस्थाओं के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीमा हसाओ जिले के DICC के महाप्रबंधक गौतम बोड़ो ने किया। उन्होंने पारंपरिक कारीगरों के कल्याण और विकास के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए लाभार्थियों से प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन रणनीति अपनाने का आह्वान किया।
MSME-DFO, शिलचर के सहायक निदेशक स्वप्नील विलासराव देशमुख ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य बताए। सहायक निदेशक सुमित गणेश गुंडैया ने पीएम विश्वकर्मा योजना के उद्देश्य, प्रमुख लाभ और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर जानकारी दी तथा दीमा हसाओ जिले में योजना की प्रगति पर प्रकाश डाला।
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, हाफलोंग के शाखा प्रबंधक पोकन मंडल ने वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाओं तथा कारीगरों के व्यवसाय विकास में उनकी भूमिका की जानकारी दी। केशव स्मारक संस्कृति सुरभि के प्रतिनिधि सजल देव ने कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, रियायती ऋण, डिजिटल प्रोत्साहन तथा ब्रांडिंग-विपणन सहायता के माध्यम से कारीगरों को सशक्त बनाने की जानकारी दी।
NIT शिलचर के सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्यानंदन मिश्र ने उद्यमिता विकास, मूल्य निर्धारण, बाजार के रुझान तथा व्यवसाय प्रबंधन के वित्तीय एवं डिजिटल पहलुओं पर व्याख्यान दिया। उप-विभागीय सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी रिजित कछारी ने निर्यात के अवसरों और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। वहीं SLPMU की वर्षा सासी ने उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभावी उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में उत्पाद की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, प्रभावी ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग पर विशेष जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में 120 से अधिक पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों के तकनीकी सत्रों और संवाद से कारीगरों को बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उत्पादों को विकसित करने की जानकारी मिली।
इसके अलावा 10 से अधिक लाभार्थियों को इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहयोग से डिजिटल भुगतान सेवाओं से जोड़ा गया। कार्यक्रम के माध्यम से कारीगरों को ब्रांडिंग, विपणन, उद्यमिता, वित्तीय एवं डिजिटल प्रबंधन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात के क्षेत्र में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई, जिससे उन्हें नए बाजारों तक पहुंच बनाने तथा अपने व्यवसाय को अधिक टिकाऊ और बाजारोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी।