लोथल, गुजरात: केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सोसाइटी की दूसरी शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत की पांच हजार वर्ष से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से विकसित किए जा रहे महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की प्रगति की समीक्षा की गई।
सोनोवाल ने कहा कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं समुद्री पहलों में से एक है। इसका उद्देश्य लोथल को समुद्री विरासत, ज्ञान, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में विश्वस्तरीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
बैठक में बताया गया कि परिसर के प्रथम चरण-ए का लगभग ८२ प्रतिशत भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। मंत्री ने कार्यान्वयन एजेंसियों को कड़ी निगरानी बनाए रखने और ३१ अक्टूबर, २०२६ की संशोधित पूर्णता समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। गैलरी संख्या ४ और ६, लोथल नगर तथा जलीय विषय-विन्यास सहित कुछ महत्वपूर्ण कार्य अभी पूरे किए जाने बाकी हैं। परिसर में प्रदर्शित किए जाने के लिए १,४९२ कलाकृतियां पहले ही तैयार की जा चुकी हैं। मंत्री ने आगंतुकों के लिए परिसर के संचालन के समय तक प्रदर्शनी शुरू करने हेतु आवश्यक अनुमोदनों में तेजी लाने का निर्देश दिया।
परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। १३ देशों—पुर्तगाल, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, ओमान, इजरायल, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, इटली, न्यूजीलैंड और सिंगापुर—ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के साथ सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। कई अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है और ३५ से अधिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की संभावित श्रृंखला तैयार की जा रही है। इन साझेदारियों के माध्यम से कलाकृतियों, प्रतिकृतियों और जहाजों के मॉडलों का आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
शासी परिषद ने परियोजना के प्रथम चरण-बी और द्वितीय चरण की योजनाओं की भी समीक्षा की। इनमें अतिरिक्त दीर्घाएं, ५-डी डोम थिएटर, तटीय राज्यों का मंडप, प्रकाशस्तंभ संग्रहालय, समुद्री अनुसंधान संस्थान, संग्रहालय-होटल तथा पर्यावरण-अनुकूल रिसॉर्ट शामिल हैं। प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाशपोत महानिदेशालय के सहयोग से प्रस्तावित प्रकाशस्तंभ संग्रहालय के विश्व का सबसे ऊंचा प्रकाशस्तंभ संग्रहालय बनने की संभावना है।
परियोजना से जुड़ी बाहरी आधारभूत संरचनाओं की भी समीक्षा की गई। धोलेरा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि उच्च गति रेल गलियारे की योजना को अंतिम रूप दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा लोथल में जारी उत्खनन कार्य भी ७० प्रतिशत पूरा हो चुका है। गुजरात सरकार परिसर के लिए संपर्क व्यवस्था, बिजली, पानी और आगंतुक सुविधाओं के विकास में सहयोग कर रही है।
शासी परिषद ने प्रस्तावित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर उपनियमों को भी मंजूरी दी, जिससे सोसाइटी के पूर्ण रूप से कार्यशील संस्था के रूप में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सोनोवाल ने परियोजना की गति का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को देते हुए कहा कि लोथल में केवल एक संग्रहालय का निर्माण नहीं किया जा रहा है, बल्कि भारत की पांच हजार वर्ष पुरानी समुद्री सभ्यता को पुनर्जीवित कर उसे पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को भारत की समुद्री विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का वैश्विक प्रतीक बनाने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों की सराहना की।