तिनसुकिया में एचआईवी/एड्स पर ६० दिवसीय गहन आईईसी अभियान शुरू

तिनसुकिया: जिला एड्स नियंत्रण कार्यालय, तिनसुकिया ने जिला स्वास्थ्य समिति, तिनसुकिया के सहयोग तथा असम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी, असम सरकार के समर्थन से ११ सितंबर, २०२६ को तिनसुकिया कॉलेज सभागार में एचआईवी/एड्स पर ६० दिवसीय गहन सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियान का शुभारंभ किया।

अभियान का औपचारिक शुभारंभ तिनसुकिया की अतिरिक्त जिला आयुक्त डॉ. मंदीरा बरुआ ने किया। कार्यक्रम के दौरान आईईसी जागरूकता वाहन को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह वाहन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों के बीच एचआईवी/एड्स से संबंधित जागरूकता संदेश प्रसारित करेगा।

इस ६० दिवसीय अभियान का उद्देश्य एचआईवी/एड्स के संबंध में सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाना है। अभियान के तहत एचआईवी से बचाव, संक्रमण के माध्यम, जांच, उपचार, देखभाल एवं सहायता सेवाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही एचआईवी/एड्स से जुड़ी भ्रांतियों और सामाजिक भेदभाव को दूर करने तथा लोगों को स्वस्थ एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान के दौरान जिलेभर में स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों, सामुदायिक संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा अन्य हितधारकों के समन्वय से विभिन्न जागरूकता और सामुदायिक पहुंच कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अभियान में सही एवं प्रमाणिक जानकारी के महत्व, समय रहते एचआईवी जांच कराने, आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार शुरू करने तथा एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों के लिए सहयोगपूर्ण और भेदभाव-मुक्त वातावरण तैयार करने पर विशेष बल दिया जाएगा।

कार्यक्रम और अभियान के तहत आयोजित जागरूकता रैली में भाग्यलक्ष्मी, गाइड-टीआई और केयर इंडिया फाउंडेशन सहित विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों एवं सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

जिला एड्स नियंत्रण कार्यालय ने सामुदायिक नेताओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवा समूहों, नागरिक समाज संगठनों, एनजीओ तथा आम जनता से अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग देने की अपील की।

अभियान का संदेश है— “स्वस्थ समुदाय, सशक्त भविष्य।”

सामूहिक प्रयासों के माध्यम से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य एचआईवी से संबंधित कलंक और भेदभाव से मुक्त एक जागरूक, समावेशी और सशक्त समाज का निर्माण करना है।

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