एसएमसी गठन में अनियमितता का आरोप, नाराज़ अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल से निकाला

अधिकांश अभिभावकों को बैठक में आमंत्रित नहीं करने का आरोप, टीसी जारी करने की मांग

सिप्रीयान डायास, हाइलाकांदी, 10 सितंबर:
हाइलाकांदी के उज़ानकोपा तृतीय खंड स्थित 407 नंबर भैयाला एलपी स्कूल में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन को लेकर व्यापक अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। इसको लेकर बड़ी संख्या में अभिभावकों में नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।

बिक्षुब्ध अभिभावकों का आरोप है कि एसएमसी गठन के लिए आयोजित बैठक की उचित सूचना अधिकांश अभिभावकों को नहीं दी गई और उन्हें पत्र के माध्यम से बैठक में आमंत्रित भी नहीं किया गया। आरोप है कि स्कूल के प्रधान शिक्षक, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा कुछ अभिभावकों ने कथित तौर पर अपने करीबी लोगों एवं रिश्तेदारों को समिति में सदस्य बनाकर एसएमसी का गठन कर दिया। अभिभावकों का कहना है कि एसएमसी जैसी महत्वपूर्ण समिति के गठन में सभी अभिभावकों को सूचना देकर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

अभिभावकों के अनुसार, उन्हें जब एसएमसी गठन की प्रक्रिया की जानकारी मिली तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। मामले को सुलझाने के लिए प्रधान शिक्षक की ओर से आपसी समझौते एवं समाधान का प्रयास भी किया गया, लेकिन नाराज़ अभिभावकों का कहना है कि इससे उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हो सका।

इसके बाद स्कूल प्रबंधन समिति के पूर्व अध्यक्ष फारूक उद्दीन बड़भुइयां के नेतृत्व में अधिकांश नाराज़ अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल से निकाल लिया। अभिभावकों का कहना है कि जब तक एसएमसी गठन की प्रक्रिया को लेकर उनकी शिकायतों का उचित समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे अपने बच्चों को उक्त विद्यालय में पढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।

इसी क्रम में अभिभावकों ने स्कूल के प्रधान शिक्षक से अपने बच्चों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जल्द जारी करने की मांग की है।

घटना के बाद क्षेत्र में विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंता का माहौल है। अभिभावकों ने संबंधित शिक्षा विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, एसएमसी गठन की प्रक्रिया की समीक्षा करने तथा यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

हालांकि, अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्कूल के प्रधान शिक्षक, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि अथवा एसएमसी के अन्य संबंधित सदस्यों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आया था।

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