शिलचर, 29 अगस्त। गुरुचरण विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओर से गत 27 अगस्त, गुरुवार को विश्व संस्कृत दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। विभाग की छात्राओं रिया दास एवं अनामिका पाल ने अतिथियों का चंदन तिलक एवं उत्तरीय से स्वागत किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों का पाठ किया। स्वागत भाषण संस्कृत विभाग की प्रमुख डॉ. संधानि नाथ ने दिया। रक्षाबंधन के अवसर पर विभाग की छात्राओं ने सभी के हाथों में राखी बांधकर आपसी सम्मान, भाईचारे एवं सुरक्षा का संदेश दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक रजिस्ट्रार डॉ. अभिजीत नाथ ने ‘एकात्मता स्तोत्र’ का उल्लेख करते हुए इसे भारत की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक एकात्मता का प्रतीक बताया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. विद्युत कांति पाल ने कहा कि वर्ष 1969 से संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, महत्व एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान पीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुचि विकसित करने की आवश्यकता बताई। मुख्य अतिथि असम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की सेवानिवृत्त प्राध्यापिका प्रो. स्निग्धा दास राय ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत एवं उसके महत्व पर चर्चा की। उन्होंने ‘सुश्रुत संहिता’ का उल्लेख करते हुए प्राचीन भारत के चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा ज्ञान तथा उसके संरक्षण में संस्कृत भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय संबोधन में गुरुचरण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन राय ने भारतीयकरण के चार महत्वपूर्ण स्तंभों पर चर्चा की तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं उसके अध्ययन में संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ‘सुश्रुत संहिता’ और ‘अर्थशास्त्र’ जैसे प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान-व्यवस्था की समृद्धि एवं विविधता पर प्रकाश डाला।
विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। स्नातक छात्रा नंदिनी देब ने कृष्ण वंदना नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. केशव लुइटेल ने संस्कृत गीत प्रस्तुत किया। अनिषा दत्त, पूर्णिमा दास, प्रसनजीत दास, अनामिका पाल, रिया दास, चंदना दास, पंचमी शुक्लवैद्य, कनिका दास, सुस्मिता दास, जॉनी रंजन दास एवं अंजन गोयाला ने सामूहिक संस्कृत गीत प्रस्तुत किया। संस्कृत में अनूदित रवींद्र संगीत पर माधवी कंसबणिक, प्रियंका दास, मुक्ता देवनाथ, भूमि दाशगुप्ता एवं रीना बर्मन ने नृत्य प्रस्तुत किया। विभाग की पीएचडी छात्रा शतरूपा भट्टाचार्य ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। अंत में कावेरी शब्दकर एवं संपि दास ने युगल नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान 11 से 22 अगस्त तक संस्कृत विभाग एवं संस्कृत भारती, पूर्वोत्तर भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय ‘स्पोकन संस्कृत’ पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत विभाग के अतिथि प्राध्यापक डॉ. भृगु राजखोवा ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. केशव लुइटेल एवं स्नातक सप्तम सेमेस्टर की छात्रा सुस्मिता सिन्हा ने किया। सामूहिक शांतिमंत्र के उच्चारण के साथ समारोह का समापन हुआ।