प्रणव कान्ति दास की पुस्तक ‘बराक पार का रोदन’ के हिन्दी संस्करण का भव्य विमोचन

प्रणव कान्ति दास की पुस्तक ‘बराक पार का रोदन’ के हिन्दी संस्करण का भव्य विमोचन

विशेष प्रतिनिधि शिलचर, 7 जून। सीतलांग प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रख्यात साहित्यकार, समाजसेवी एवं कवि प्रणव कान्ति दास की चर्चित बांग्ला कृति ‘बराक पार का रोदन’ के हिन्दी अनुवाद संस्करण का रविवार को शिलचर में गरिमामय वातावरण में विमोचन किया गया। पुस्तक का हिन्दी अनुवाद प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं शिक्षाविद अशोक वर्मा ने किया है।

आयोजित समारोह में क्षेत्र के अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती झूमर पांडेय, प्रेरणा भारती के मुख्य संपादक दिलीप कुमार, विमेंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुजीत तिवारी, श्रीमती बिंदु सिंह, राजू वर्मा, उत्तम सरकार, चंदन शुक्लवैद, श्यामा प्रसाद कोइरी, चंदन कोइरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन सत्यजीत नाथ ने किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने वर्तमान समय में प्रिंटेड साहित्य और पुस्तक संस्कृति के सामने उपस्थित चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में साहित्यिक पुस्तकों के प्रति पाठकों की रुचि बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसके बावजूद साहित्य सृजन, अनुवाद और प्रकाशन के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहे रचनाकारों और प्रकाशकों का योगदान अत्यंत सराहनीय है।

वक्ताओं ने विशेष रूप से लेखक प्रणव कान्ति दास, अनुवादक अशोक वर्मा तथा सीतलांग प्रकाशन की प्रशंसा करते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के उत्कृष्ट साहित्य को हिन्दी के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। इस अवसर पर अशोक वर्मा के साहित्यिक योगदान और उनकी रचनात्मक प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया गया।

अपने संदेश में अशोक वर्मा ने कहा कि प्रणव कान्ति दास मूलतः एक संवेदनशील साहित्यकार, समाजसेवी तथा कवि हैं। उनकी कविताएं उनके चिंतन, मनन और भाव-जगत की गहराइयों से परिचित कराती हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएं, करुणा, प्रेम, स्नेह और मानवता के प्रति गहरा लगाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

उन्होंने कहा कि इस संकलन में प्रणव कान्ति दास की चयनित कविताओं के हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किए गए हैं और उन्हें विश्वास है कि हिन्दी पाठक इन कविताओं के भाव-संसार से आत्मीय रूप से जुड़ सकेंगे। पुस्तक के माध्यम से बराक घाटी की संवेदनाओं, संघर्षों और मानवीय अनुभवों को हिन्दी जगत तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया गया है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने पुस्तक की सफलता तथा लेखक, अनुवादक एवं प्रकाशक के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Leave a Comment