एनआईटी शिलचर में नराकास की 66वीं छमाही बैठक आयोजित

कार्यालयों में सरल, सहज और प्रभावी हिंदी के प्रयोग पर दिया गया विशेष जोर

शिव कुमार, शिलचर, 12 मई। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग के अधीन नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), सिलचर की 66वीं छमाही बैठक मंगलवार को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी शिलचर में आयोजित की गई। संस्थान के नवनिर्मित अतिथि गृह सभागार में सुबह 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में भारत सरकार के विभिन्न विभागों, केंद्रीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा बैंकों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। बैठक में राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन, सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने तथा सरल एवं व्यवहारिक हिंदी को प्रोत्साहित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक ने अपने संबोधन में एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निदेशक अमित कुमार सिंह, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक शांत सिंह सहित सभी उपस्थित अतिथियों, विभागाध्यक्षों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों ने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद बैठक में भाग लेकर राजभाषा हिंदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।

निदेशक ने कहा कि हिंदी को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय कार्यालयीन कार्यों में उसका उपयोग निर्धारित लक्ष्यों से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निरंतर, योजनाबद्ध और ईमानदार प्रयासों से ही हिंदी को प्रशासनिक कार्यों की प्रभावी भाषा बनाया जा सकता है।

उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे राजभाषा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अनेक कार्यालय हिंदी के प्रयोग में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, जबकि अन्य विभाग भी छोटे-छोटे प्रयासों से इसकी सशक्त शुरुआत कर सकते हैं। उनका कहना था कि भाषा का मूल उद्देश्य संवाद को सरल और प्रभावी बनाना है। अत्यधिक साहित्यिक हिंदी आमजन के लिए कई बार कठिन हो जाती है, इसलिए भारत सरकार सरल एवं सहज हिंदी के प्रयोग पर विशेष बल दे रही है।

देश की भाषाई विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी हिंदी अपनाई जानी चाहिए जिसे हर व्यक्ति आसानी से समझ सके। उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रेरणा से विकसित राजभाषा हिंदी के “12 पी मॉडल” का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रेम, पुरस्कार, प्रशिक्षण, प्रयोग और प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण तत्व शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी का प्रयोग पहले की तुलना में अधिक सरल हो गया है। ई-प्रशिक्षण, यूनिकोड आधारित तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। निदेशक ने सभी कार्यालय प्रमुखों से अपने-अपने विभागों में हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने तथा स्थानीय स्तर पर हिंदी प्रोत्साहन योजनाएं संचालित करने का आग्रह किया।

बैठक के दौरान उन्होंने यह प्रस्ताव भी रखा कि अगली छमाही बैठक तक राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले सभी दस्तावेजों को शत-प्रतिशत द्विभाषी बनाने का प्रयास किया जाए।

बैठक के प्रारंभ में सदस्य सचिव डॉ. प्रवीण कुमार गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पिछले छह माह की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि छमाही बैठकों का उद्देश्य राजभाषा नीति के प्रभावी अनुपालन की समीक्षा करना और उससे संबंधित सुझाव प्राप्त करना है।

अन्य वक्ताओं में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप कुमार तथा असम विश्वविद्यालय की मिली रानी पाल ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और अनुपालन को लेकर अपने विचार रखे। मिली रानी पाल ने सुझाव दिया कि “शिलचर” की वर्तनी हिंदी में ‘स’ के स्थान पर ‘श’ से लिखी जानी चाहिए।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने विभागों में हिंदी के प्रभावी उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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