असम में बिजली कर्मियों की हड़ताल, बिजली संशोधन बिल 2025 और नई बिजली नीति रद्द करने की मांग
शिलचर, 12 फरवरी:
केन्द्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशन एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर तथा बिजली कर्मियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति के समर्थन में गुरुवार को असम में बिजली कर्मी, इंजीनियर और पेंशनभोगी हड़ताल पर रहे। राज्य भर में विभिन्न कार्यालय परिसरों में धरना-प्रदर्शन आयोजित कर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई।
हड़ताल के तहत सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक असम के बिजली विभाग के सभी प्रमुख कार्यालयों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। कछार सर्कल के मेहरपुर स्थित बिजली भवन कार्यालय परिसर में आयोजित धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बिजली संशोधन विधेयक 2025 और प्रस्तावित राष्ट्रीय बिजली नीति 2026 को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये नीतियां बिजली कर्मियों और उपभोक्ताओं के हितों के प्रतिकूल हैं।
वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने, नए श्रम संहिताओं को वापस लेने, किसानों को फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने तथा ठेका प्रथा समाप्त कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग उठाई।
मेहरपुर में आयोजित कार्यक्रम में निर्मल कुमार दास, विश्वजीत कर सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इस अवसर पर जनरल मैनेजर तन्मय बोरा, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर ए. जेड. मोहम्मद सुलेमान, कृष्णेंदु नाथ, अरिजीत दास, बापी दास, यीशु नाथ, संतोष रॉय, दिव्येंदु दास और विजित भट्टाचार्य सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
इसी क्रम में शिलचर के पानपट्टी कार्यालय परिसर में भी धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां चंचल भट्टाचार्य, तापस रंजन आइयन, बिमल सिन्हा, पिनाक पानी होम चौधुरी, राजू वर्मा और चित्र भानु भौमिक सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अरूप पाल, कल्लोल देव राय और मलय भट्टाचार्जी सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं पेंशनभोगी मौजूद रहे।
समन्वय समिति के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।