कोकराझार में विश्व हिंदू महासंघ की बैठक संपन्न, नवंबर में होगा भव्य महायज्ञ

​कोकराझार, 16 जुलाई: कोकराझार शहर के मौवन भवन में गुरुवार को विश्व हिंदू महासंघ की कोकराझार जिला समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन को मजबूती प्रदान करने और आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। ​संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक सरोकार पर जोर कार्यक्रम में विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश … Read more

चढ़ावे की हेराफेरी : पकड़े गए तो चोर, नहीं तो साधु समझो

राधा रमणएक माह बीत जाने के बावजूद अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी कामामला ‘ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया’ की मानिन्द लगातार उलझता जारहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दी गई 15 दिनों की समयसीमासमाप्त हो गई। इस बीच उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल(एसआईटी) को जांच पूरी करने की अवधि बढ़ाकर … Read more

मंडल आयोग : अधिकांश सिफारिशें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं

– ई0 प्रभात किशोर भारत का संविधान अपने नागरिकों को समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है, परन्तु सामाजिक भेदभाव के कारण, समाज के एक बड़े वर्ग का सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में अल्प प्रतिनिधित्व है। सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करने के लिए जनता पार्टी सरकार के द्वारा 1 जनवरी 1979 को श्री बी.पी. मंडल की अध्यक्षता में द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना की गई थी। आयोग ने 31 दिसंबर 1980 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, परन्तु यह कांग्रेस शासन के पूरे एक दशक तक ठंढे बस्ते में पड़ी रही। सन 1989 में जब जनता दल सरकार सत्ता में आई, तो 13 अगस्त 1990 को केंद्र सरकार और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की सेवाओं में पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना जारी की गई। रिपोर्ट से उल्लिखित है कि “हिंदू और गैर-हिंदू दोनों श्रेणी के पिछडे वर्ग की जनसंख्या  भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 52 प्रतिशत है। तदनुसार, केंद्र सरकार के तहत सभी पदों में से 52 प्रतिशत का यथानुपात आरक्षण उनके लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। परन्तु यह प्रावधान उच्चतम न्यायालय के उन निर्णयों के विरूद्ध होगा, जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत आरक्षण की कुल मात्रा 50 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। इसे देखते हुए, पिछडे वर्गों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की सीमा इस प्रकार निर्धारित की जाय कि अनु0 जाति एवं जनजाति के लिए प्रावधानित आरक्षण 22.5 प्रतिशत में जोड़ने पर वह 50 प्रतिशत से नीचे रहे। इन कानूनी बाधाओं को देखते हुए, आयोग ने केवल 27 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा की, भले ही उनकी जनसंख्या प्रावधानित अनुशंसा से दोगुनी हो। जिन राज्यों ने पहले ही ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत से अधिक आरक्षण लागू कर दिया है, वे इस अनुशंसा से अप्रभावित रहेंगे।‘‘ न्यायालय के द्वारा 50 प्रतिशत सीलिंग की कानूनी बाध्यता के कारण आयोग द्वारा पिछड़े वर्ग के लिए मात्र 27 प्रतिशत आरक्षण की अनुशंसा की गई है, अन्यथा यह अनुशंसा जनसंख्या अनुपात के अनुसार यानी 52 प्रतिशत होती। अगड़़ी जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान के लिए वर्ष 2019 में, 103वें संविधान संशोधन के माध्यम से सीमा को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यही प्रक्रिया पिछड़े वर्गों को भी महज 27 प्रतिशत के स्थान पर 52 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए की जानी चाहिए थी, लेकिन खंडित दबे-कुचले तबके कभी भी सरकारों की प्राथमिकता सूची में नहीं रहे । जनता दल एवं बाद की अन्य दलों की केंद्र सरकारों ने मंडल आयोग की सभी अनुशंसाओं  को लागू नहीं किया । आयोग की अनुशंसायें केवल सरकारी सेवाओं (जो जनसंख्या के 1 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं) के लिए नहीं हैं बल्कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए है, ताकि एक निश्चित अवधि के बाद सभी नागरिक एक ही बेंच मार्क पर खड़े हो सकें। अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के द्वारा निम्नलिखित योजनाओं की अनुशंसा की गई है, जिनका क्रियान्वयन अभी प्रतीक्षित है:- (1) एक खुली प्रतियोगिता में गुणागुण आधार पर नियोजित पिछडे वर्ग के उम्मीदवारों को उनके 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा में समायोजित नहीं किया जाना चाहिए। (2) उपरोक्त आरक्षण को सभी स्तरों पर पदोन्नति में भी लागू किया जाना चाहिए। (3) आरक्षित कोटा जो भरा नहीं गया है उसे तीन साल की अवधि के लिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए और उसके बाद अनारक्षित किया जाना चाहिए। (4) सीधी भर्ती के लिए ऊपरी आयु सीमा में छूट ओबीसी के उम्मीदवारों को उसी तरह दी जानी चाहिए जैसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मामले में दी जाती है। (5) संबंधित प्राधिकारियों द्वारा प्रत्येक श्रेणी के पदों के लिए रोस्टर प्रणाली उसी प्रकार से अपनाई जानी चाहिए जैसे वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के संबंध में अपनाई जाती है। (6) आरक्षण की उपरोक्त योजना केंद्र और राज्य सरकारों के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों के लिए भी सभी भर्तियों पर लागू होनी चाहिए। (7) सभी निजी क्षेत्र के उपक्रम जिन्हें सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है, उन्हें उपरोक्त आधार पर कर्मियों की भर्ती करनी चाहिए। (8) सभी विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों को भी उपरोक्त आरक्षण योजना के अंतर्गत शामिल किया जाना चाहिए। शैक्षिक रियायतें:- चयनात्मक आधार पर शुरू किया गया प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम और आवासीय विद्यालय पूरे समुदाय की चेतना के बढ़ते बिंदुओं के रूप में कार्य करेंगे। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यवसायिक संस्थानों में पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए 27 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जानी चाहिए। वे राज्य, जिन्होंने पहले ही इनके लिए 27 प्रतिशत से अधिक सीटें आरक्षित कर रखी हैं, वे इन अनुशंसाओं से अप्रभावित रहेंगे। हमारे तकनीकी और पेशेवर संस्थानों में ऐसे सभी छात्रों के लिए विशेष कोचिंग सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि ये युवा निराश और अपमानित महसूस न करें और साथ ही देश में अकुशल और घटिया इंजीनियरों, डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों के साथ देश न उतरे। वित्तीय सहायता: – व्यवसायिक समुदायों (जैसे ग्रामीण कुम्हार, तेल कोल्हू, लोहार, बढ़ई आदि) के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए अलग-अलग वित्तीय संस्थान स्थापित किए जाने चाहिए। संरचनात्मक परिवर्तन:- सभी राज्य सरकारों को प्रगतिशील भूमि कानून बनाने और लागू करने के लिए निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण इलाकों में मौजूदा उत्पादन संबंधों में बुनियादी संरचनात्मक परिवर्तन किए जा सकें। वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को अधिशेष भूमि आवंटित की जा रही है। भूमि हदबंदी कानूनों आदि के लागू होने के परिणामस्वरूप भविष्य में उपलब्ध होने वाली अतिरिक्त भूमि का एक हिस्सा भी अन्य पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन श्रमिकों को आवंटित किया जाना चाहिए। मिश्रित: – (1) व्यावसायिक समुदायों के कुछ वर्ग जैसे मछुआरे, बंजारे, खटवे, बाँसफोर आदि, जो अभी भी अस्पृश्यता से पीड़ित हैं, को अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जा सकता है। (2) पिछड़ा वर्ग विकास निगमों को उनकी उन्नति के लिए विभिन्न सामाजिक-शैक्षिक और आर्थिक उपायों को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्थापित किया जाना चाहिए। (3) पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्यों में एक अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए। (4) अत्यंत पिछड़े वर्गों यथा- हिमाचल प्रदेश में गद्दी, महाराष्ट्र में नव-बौद्ध, तटीय क्षेत्रों में मछुआरे, जम्मू एवं कश्मीर में गुर्जरों को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के लिए, परिसीमन के दौरान उनकी सघनता वाले क्षेत्रों को अलग निर्वाचन क्षेत्र बनाया जाना चाहिए। केन्द्रीय सहायता:- राज्य सरकार द्वारा सभी विकास कार्यक्रमों, विशेष रूप से पिछड़े वर्गों के लिए, केंद्र सरकार द्वारा उसी तरह और उसी सीमा तक वित्तपोषित किया जाना चाहिए जैसा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मामले में किया जाता है। पूरी योजना को केवल बीस साल (यानी एक पीढ़ी की अवधि) के बाद संशोधित किया जाना चाहिए। कम अंतराल पर कोई समीक्षा पिछडे वर्ग की वर्तमान स्थिति और जीवन शैली पर अनुशंसाओं के प्रभाव का उचित आकलन संभव नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट 1931 की पिछली जनगणना के यथानुपात आधारित थी। 2021 के बाद की आगामी जनगणना में जातिवार सर्वेक्षण और पिछडे वर्गों को उनकी जनसंख्या के … Read more

असम विश्वविद्यालय, शिलचर में राजभाषा हिंदी कार्यशाला का आयोजन

असम विश्वविद्यालय, शिलचर के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा “तकनीकी कौशल का विकास: हिंदी टंकण एक प्रयास” विषय पर एक हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना था। इस कार्यशाला में असम विश्वविद्यालय के … Read more

डिब्रूगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन ने CSIR UGC-NET एग्जामिनेशन सेंटर के आसपास पाबंदियां लगाईं

डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने 17 और 18 जुलाई को होने वाली जॉइंट CSIR UGC-NET जून 2026 एग्जाम को आसानी से और फेयर तरीके से कराने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के सेक्शन 163 के तहत रोक का ऑर्डर जारी किया है। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट देबा नारायण हजारिका, ACS द्वारा जारी ऑर्डर … Read more

गवर्नर ने मनोहारी टी एस्टेट का दौरा किया, डिब्रूगढ़ में टी टेस्टिंग और टूरिस्ट लाउंज का उद्घाटन किया

डिब्रूगढ़: असम के गवर्नर लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुरुवार को डिब्रूगढ़ में मनोहारी टी एस्टेट का दौरा किया, जहाँ उन्होंने चाय बागान के मज़दूरों, उनके परिवारों, स्टूडेंट्स और एस्टेट अधिकारियों से बातचीत की, और असम के चाय समुदाय की भलाई और उन्हें मज़बूत बनाने के लिए सरकार के कमिटमेंट को दोहराया। इस दौरे के दौरान, … Read more

शिलचर वन बंधु परिषद महिला समिति की एकल वन यात्रा संपन्न, विद्यार्थियों को स्टेशनरी, वस्त्र व प्रोत्साहन पुरस्कार वितरित

शिलचर, 16 जुलाई। शिलचर वन बंधु परिषद महिला समिति द्वारा आयोजित एकल वन यात्रा के अंतर्गत 8 जुलाई 2026 को दूधपतिल स्थित ग्राम राधानगर के एकल विद्यालय में सेवा एवं प्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समिति की सात सदस्याओं तथा एक अतिथि ने भाग लिया। विद्यालय पहुंचने पर तिलक लगाकर अतिथियों का … Read more

डिब्रूगढ़ में 12वें श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव में आध्यात्मिक उत्साह; असम के गवर्नर ने पवित्र रथ खींचा

डिब्रूगढ़: गुरुवार को डिब्रूगढ़ में भक्ति, परंपरा और धार्मिक सद्भाव की भावना हवा में भर गई, जब हज़ारों भक्त श्री श्री जगन्नाथ कल्चरल कॉम्प्लेक्स, श्रीक्षेत्र, खनिकर में 12वें श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव की शानदार शुरुआत देखने के लिए इकट्ठा हुए। श्री श्री जगन्नाथ कल्चरल ट्रस्ट, डिब्रूगढ़ द्वारा आयोजित नौ दिन का धार्मिक उत्सव पारंपरिक … Read more

शिलचर में चार विद्यालयों में पंद्रह दिवसीय ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभकला, संस्कृति और रचनात्मक प्रतिभा को निखारने की पहल; पहले ही दिन विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी

शिलचर, 16 जुलाई। ग्रीष्मावकाश को केवल अवकाश का समय न मानकर बच्चों के लिए कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच बनाने के उद्देश्य से उधारबंद विधानसभा क्षेत्र के चार विद्यालयों में गुरुवार से पंद्रह दिवसीय ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। असम सरकार के सांस्कृतिक कार्य विभाग की पहल तथा कछार जिला प्रशासन के सहयोग … Read more

सुबह-सुबह रामकृष्णनगर में भीषण हादसा: तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर स्टेशनरी दुकान में घुसी, बड़ा हादसा टला

गौतम सरकार एवं हीरक बनिक, रामकृष्णनगर, 16 जुलाई। गुरुवार की सुबह रामकृष्णनगर के बालीछड़ा क्षेत्र में एक तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर सड़क छोड़ सीधे एक स्टेशनरी दुकान में घुस जाने से सनसनी फैल गई। इस दुर्घटना में दुकान को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि दुकान मालिक और उनके परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए। प्रत्यक्षदर्शियों … Read more