असम विश्वविद्यालय, शिलचर में राजभाषा हिंदी कार्यशाला का आयोजन

असम विश्वविद्यालय, शिलचर के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा “तकनीकी कौशल का विकास: हिंदी टंकण एक प्रयास” विषय पर एक हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और राजभाषा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना था। इस कार्यशाला में असम विश्वविद्यालय के लगभग 50 कर्मचारी एवं अधिकारी थे। कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मोहन पंत ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने हिंदी को प्रशासनिक कार्यों में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया और आधुनिक तकनीकी का प्रयोग कर हम हिंदी को और भी आगे ले जा सकते हैं। इसके माध्यम से हम निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।  कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप प्राचार्य डॉ हरपाल सिंह ने “तकनीकी कौशल का विकास: हिंदी टंकण एक प्रयास”। उन्होंने कठस्थ २.०, भारती और एआई जैसे राजभाषा टूल्स एवं तकनीकी के उपयोग और हिंदी के कार्यान्वयन में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रतिभागियों को बताया। साथ ही कंप्यूटर लैब में कर्मचारियों को हिंदी से सम्बन्धित प्रायोगिक कार्य भी करवाया।  डॉ प्रदोष किरण नाथ ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब मैं फ़ाइलों पर हिंदी में हस्ताक्षर करता हूं इससे हिंदी के विकास को गति मिलेगी। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आकाश वर्मा ने भी अपने विचारों से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। हिंदी अधिकारी डॉ सुरेंद्र कुमार उपाध्याय ने सभी के प्रति आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित  किया। सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्यों में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करें। कार्यशाला का संचालन असम विश्वविद्यालय के हिंदी अनुवादक श्रीमती मीली रानी पाल ने किया। कार्यशाला के सफलता के लिए संतोष ग्वाला, हिंदी टंकक और पृथ्वीराज ग्वाला का विशेष योगदान रहा। यह आयोजन राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढाने और प्रशासनिक कार्यों में इसके उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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