रघुवीर सहाय की तीन क्रांतिकारी कविताएं
रघुवीर सहाय की तीन क्रांतिकारी कविताएं तोड़ो तोड़ो तोड़ो- रघुवीर सहाय तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है आधे आधे गाने तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये ऊसर बंजर … Read more