अतिशय विकास अर्थात सर्वनाश अंक-२ –आनंद शास्त्री
मित्रों ! एक अत्यंत ही मर्मस्पर्शी कथा आपके लिये लेकर आया हूँ ! लगभग पन्द्रह वर्ष पूर्व कानपुर की ये सत्य घटना है ! वहाँ अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के लिये आवश्यक कुछ वस्तुओं को लेने मैं गया था ! कुछ जल्दी पहुंचने के कारण प्रतिष्ठान बन्द था वहाँ टहलते हुए पास की एक कालोनी तक … Read more