क्या पेजर की तरह मोबाइल फोन के जरिए भी होंगे ब्लास्ट? भारत के लिए कितना बड़ा खतरा

समा. एजेंसी नई दिल्ली, 21 सितंबर: लेबनान और सीरिया में कई ब्लास्ट हुए हैं, 4000 से ज्यादा लोग घायल हुए, अब तक 11 की मौत हो चुकी है। पता यह चल है कि पेजर्स को हैकर उन्हें ही ब्लास्ट करवा दिया गया। एक के बाद एक कई पेजर्स को ऐसे ही ब्लास्ट किया गया और बड़े स्तर पर तबाही हुई। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह हमला किसने करवाया, लेकिन लेबनान का शक इजरायल की तरफ है। उसे लग रहा है कि इजरायल की खुफिया एंजेसी मोसाद ने इस हमले को अंजाम दिया।
यह पेजर होता क्या है, कैसे काम करता है?
अब सभी के मन में दो सवाल आ रहे हैं, पहला यह कि आखिर पेजर्स होता क्या है, दूसरा यह कि क्या मोबाइल फोन्स में भी ऐसे ही ब्लास्ट हो सकते हैं? अब पहले सवाल का जवाब तो काफी आसान है। पेजर्स भी मैसेज भेजने वाला एक डिवाइस है, फर्क सिर्फ इतना होता है कि यह रेडियो सिग्नल के जरिए मैसेज सेंड और रिसीव करता है। पूरी दुनिया में ही इस पेजर डिवाइस का काफी इस्तेमाल हुआ है।
जब मोबाइल फोन ज्यादा पॉपुलर नहीं हुए थे, जब उनका रेट ज्यादा रहता था, तब लोगों के लिए पेजर्स ही मैसेज भेजने और रिसीव करने का साधन था। भारत ने एक जमाने में इस पेजर का काफी इस्तेमाल किया। लेकिन पेजर्स के साथ एक बड़ी समस्या भी है। इसका सिक्योरिटी सिस्टम काफी लचर है, मतलब अगर किसी को सामान्य हैकिंग भी आती है, वो इस डिवाइस के साथ खिलवाड़ कर सकता है। पेजर के जरिए जो भी मैसेज भेजे जाते हैं, वो इनक्रिप्टेड नहीं होते। ऐसा माना जा रहा है कि इस बार जो लेबनान में हमला हुआ है, वहां भी इसी तरह से पेजर्स को हैक किया गया।
क्या आपका फोन एक बम बन सकता है?
अब आते हैं दूसरे सवाल पर, क्या मोबाइल फोन को भी ऐसे ही ब्लास्ट किया जा सकता है? इसका जवाब हां है क्योंकि टेक्नोलॉजी जिस तरह से डेवलप हो रही है, जिस तरह से वो लगातार बदल रही है, आने वाले दिनों में कुछ भी नामुमकिन नहीं रहने वाला। वैसे मोबाइल को हैक करना काफी मुश्किल है। जानकार मानते हैं कि Android और iOS मॉडल्स में हैक होने की संभावना भी अलग-अलग है। ऐसा देखा गया है कि iOS की तुलना में Android को ज्यादा आसानी से हैक किया जा सकता है।
वैसे मोबाइल फोन में ब्लास्ट हो सकता है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। एक छोटे एक्सप्लोसिव को जरूर फिट किया जा सकता है। बमों की दुनिया में एक C4 नाम का एक्सप्लोसिव होता है जिसे फोन के बैटरी में फिट किया जाता है, उसके जरिए ही धमाके होते हैं। समझने वाली बात यह भी है कि वायरलेस सिग्नल के जरिए धमाके होते हैं। उदाहरण के लिए ब्लूटूथ या किसी दूसरे नेटवर्क के जरिए सिग्नल भेजे जाते हैं और ब्लास्ट हो जाते हैं।
भारत के लोग क्या बड़ी गलती कर रहे?
अब भारत के लिए भी यह ट्रेंड खतरनाक इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ समय में स्मार्ट फोन का चलन काफी ज्यादा बढ़ चुका है। भारत में करोड़ों लोग स्मार्ट फोन खरीद भी रहे हैं और उसका खूब इस्तेमाल भी हो रहा है। हैरानी की बात यह भी है कि फोन खरीदते वक्त लोग ज्यादा चेकिंग नहीं करते हैं, कहां से फोन आया है, किस देश में बना है। ऐसे पहलू हर बार नजरअंदाज हो जाते हैं। अब जानकार मानते हैं कि यह छोटी गलतियां ही बाद में किसी बड़े हमले का रूप भी ले सकती हैं।
एक और बड़ा खतरा दे चुका दस्तक
इसके ऊपर जिस स्पीड से टेक्नोलॉजी अब बदल रही है, लोगों को भी जागरूक बनना पड़ेगा। जब से AI ने इस दुनिया में दस्तक दी है, कई ऐसे काम चुटकियों में होने लगे हैं जिनके बारे में पहले कभी सोचा भी नहीं जाता था। उदाहरण के लिए AI Voice Cloning एक ऐसा हथियार बन चुका है जिसके जरिए लोग बड़े-बड़े स्कैम को अंजाम दे रहे हैं, किसी दूसरे आदमी की आवाज में किसी दूसरे आदमी से बात की जाती है, कम्युनिकेशन गैप होता है और फिर बड़े खेल होते दिख जाते हैं। आने वाले समय में इसे भी देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। देश के दुश्मन इसका इस्तेमाल भी अपने फायदे के लिए कर सकते हैं।

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