भारतीय इक्विटी और इण्डेक्स का कमाल विश्व बेहाल-(2) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! एनएसई एवं बीएसई को सरकारी जूवे एवं सट्टेबाजी के नाम से बदनाम उन धैर्यहीन लोगों ने किया है जो कभी मुम्बई और महाराष्ट्र में संचालित जहन्नुम नशीं दाऊद इब्राहीम के -“मटके के खेल ” को जानते और खेलते थे ! मैं समझता हूँ कि भारतीय एवं वैश्विक शेयर बाजार में लिस्टेड विशुद्ध … Read more

भारतीय इक्विटी और इण्डेक्स का कमाल विश्व बेहाल-(1) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! वैश्विक अर्थव्यवस्था के सापेक्ष भारतीय अर्थव्यवस्था आज सभी चुनौतियों को बहुत पीछे छोड़कर मंथर गति से किसी एरावत हाथी की तरह वैश्विक बाजारों की अनदेखी करती हुयी चलती जा रही है ! चलती ही जा रही है ! मानवीय जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं को अपनी पैनी नजर से भांपकर स्वदेशी … Read more

“दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घ श्रान्तस्य योजनम् — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! अंतर्राष्ट्रीय असुरक्षित,सामरिक अत्याधुनिक एवं प्राचीन अस्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों की अंधी दौड़,प्राकृतिक आपदाओं,अतिशय विकसित एवं अतिशय अविकसित राष्ट्रों के नाम पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी तथाकथित मानव सभ्यता आज किंकर्तव्यविमूढ़ सी हुयी आत्मविश्लेषण करने को बाध्य हो चुकी ! और ऐसा होना ही था ! महाभारत से लेकर प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध … Read more

“न कालो दण्डमुद्यम्य शिरः कृतन्ति कस्यचित्” — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! संत तुलसीदास जी कहते हैं कि- “राम किसी को मारत नहीं, इतने पापी नहीं राम। अपने- अपने पाप से, मर जाते हैं आपोआप॥” यत्र तत्र सर्वत्र मंहगाई,बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाला देश का सबसे मंहगा और भ्रष्ट राजनैतिक दल अर्थात-“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” आज अपनी अर्थी अपने कन्धों पर ढोने को … Read more

शब्दाक्षर’ का काव्य-अनुष्ठान सम्पन्न

कोलकाता/रायपुर:-राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘शब्दाक्षर’ (पंजीकृत) की छत्तीसगढ़ प्रदेश इकाई द्वारा रायपुर शहर के वृंदावन हॉल में शनिवार को आयोजित काव्य अनुष्ठान सफलता पूर्वक संपन्न हुआ. कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रसिद्ध साहित्यकार भाषाविद,डॉ. चितरंजन कर, मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर प्रदीप यदु एवं विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध गीतकार दिनेश गौतम रहे. मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के पश्चात डॉ.अमृता शुक्ला … Read more

कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय में एकदिवसीय सरल मानक संस्कृत का कार्यशाला संपन्न हुआ

गत 9 फरवरी 2024 को नलबाड़ी स्थित कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ भारतीय भाषा समिति, संस्कृत भारती, उत्तर पूर्वांचल न्यास एवं कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उक्त कार्यशाला को आयोजित किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, आचार्य … Read more

विश्व रिकॉर्ड में सम्मिलित हुए शिलचर शहर से सुषमा पारख

दुनिया के सबसे बड़े कवि सम्मेलन में प्रतिभाग कर विश्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा कर शिलचर की सुषमा ने बढ़ाया शहर का मान बुलंदी संस्था द्वारा विश्व हिंदी दिवस से प्रारंभ हिंदी की वैश्विक यात्रा बुलंदी पर हिंदी अनवरत कवि सम्मेलन को हॉवर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा विश्व रिकॉर्ड में सम्मिलित किया गया है … Read more

धम्मपद यमकवग्गो~१७ सूत्र- अंक~१७ — आनंद शास्त्री

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मपद के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के 18 वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “इध तप्पति पेच्च तप्पति पापकारी उभयत्ध तप्पति। पापं मे कतं ति तप्पति भिय्यो तप्पति दुग्गतिं गतो।१७।। इसे संस्कृत में कहते हैं … Read more

धम्मपद यमकवग्गो~ सूत्र-16 अंक~16

प्निय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित #धम्मपद के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के 16 वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “इध मोदति पेच्च मोदति कतपुञ्ञो उभयत्थ मोदति। सो मोदति सो पमोदति दिस्स्वा कम्म विसुद्धिमत्तनो।।” इसे संस्कृत में कहते हैं कि- मोदतेऽत्र … Read more

धम्मपद यमकवग्गो~15 सूत्र- अंक~15 — आनंद शास्त्री

नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मपद्द के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के १५ वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “इध सोचति पेच्च सोचति पापकारी उभयत्थ सोचति। सोचति सो विहञ्ञति दिस्स्वा कम्म किलिट्ठत्तनो।।१५।।”अर्थात शोचतीह तथा प्रेत्य चोभयत्राऽपि पापकृत्। दुष्कर्म चात्मनो दृष्ट्वा शोचत्येष विहन्यते।। सम्माननीय … Read more