धम्मपद यमकवग्गो~ सूत्र- 14 अंक~14 — आनंद शास्त्री
सम्माननीय मित्रों ! नित्यसत्यचित्त बुद्धमुक्त पदऽस्थित तथागत महात्मा बुद्ध द्वारा उपदेशित धम्मपद्द के भावानुवाद अंतर्गत स्वकृत बाल प्रबोधिनी में यमकवग्गो के १४ वें पद्द का पुष्पानुवाद उनके ही श्री चरणों में निवेदित कर रहा हूँ— “यथा अगारं सुच्छन्नं वुट्ठि न समतिविज्झति। एवं सुभावितं चित्तं रागो न समतिविज्झति।।४।।” अर्थात- यथा ह्यगारं सुच्छन्नं वृष्टिर्नैवाभिविध्यति। एवं सुभावितं चित्तं नैव … Read more