स्वस्थ मिट्टी के संरक्षण हेतु ‘खेती बचाओ अभियान’ के अंतर्गत किसानों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित

स्वस्थ मिट्टी के संरक्षण हेतु ‘खेती बचाओ अभियान’ के अंतर्गत किसानों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित
प्रीतम दास हाइलाकांदी, ४ जून: कृषि भूमि की उर्वरता को बनाए रखने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइलाकांदी में ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), हाइलाकांदी तथा जिला कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को जिला कृषि विभाग के एसटीसी हॉल में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।देशभर में १ जून से ३० जून तक मनाए जा रहे ‘खेती बचाओ अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग की प्रवृत्ति दीर्घकाल में मिट्टी की प्राकृतिक संरचना एवं उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। इसलिए किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की जांच कर आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों के प्रयोग की सलाह दी गई।कार्यक्रम में केवीके हाइलाकांदी की प्रोग्राम असिस्टेंट (फूड साइंस/होम साइंस) कविता सी. शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए समन्वित पोषण प्रबंधन (इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट) अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के साथ साथ जैविक एवं जैव-उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने से मिट्टी का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सकता है तथा कृषि उत्पादन को दीर्घकालीन रूप से टिकाऊ बनाया जा सकता है।कार्यशाला में उपस्थित किसानों ने मिट्टी की उर्वरता संरक्षण आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग तथा पोषण प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने कृषि कार्यों के दौरान आने वाली समस्याओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा और आवश्यक परामर्श प्राप्त किया।इसके अतिरिक्त जिला कृषि विभाग के कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) राजीबुल हक मोल्ला तथा कृषि निरीक्षक इनाम उद्दीन लस्कर ने किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा कृषि विकास से संबंधित विभिन्न सरकारी पहलों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से उत्पादन बढ़ाने के साथ साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक भूमिका निभाने का आह्वान किया।कुल ३२ किसानों की सहभागिता वाले इस कार्यक्रम का प्रश्नोत्तर सत्र अत्यंत जीवंत और उपयोगी रहा। इस दौरान किसानों ने जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याओं को साझा किया तथा विशेषज्ञों से उनके प्रभावी समाधान और मार्गदर्शन प्राप्त किए।कार्यक्रम के समापन पर किसानों ने मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा संतुलित उर्वरक उपयोग तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि कृषि की स्थिरता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वस्थ मिट्टी का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए आने वाली पीढ़ियों के हित में कृषि भूमि की उर्वरता को संरक्षित रखने हेतु सभी को सामूहिक रूप से आगे आना होगा।

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