स्वर झंकार और गुरुकुल परंपरा के संयुक्त प्रयास में आयोजित होने जा रही है, शास्त्रीय संगीत की एक मनमोहक संध्या

शिलचर, 26 अक्टूबर: भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आगामी 1 नवंबर, रविवार को शिलचर के स्थानीय बंग भवन में एक मनमोहक संध्याकालीन शास्त्रीय संगीत समारोह का आयोजन होने जा रहा है। महाराष्ट्र के पुणे स्थित शास्त्रीय संगीत की संस्था ‘स्वर झंकार’ और सिलचर के सुप्रसिद्ध संगीत शिक्षण संस्थान ‘गुरुकुल परंपरा’ के संयुक्त प्रयास में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न विधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दर्शकों के समक्ष पेश की जाएँगी। इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ पुणे से आए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।

इस संध्याकालीन संगीत समारोह में खयाल गायन, बाँसुरी वादन, तबला वादन, हारमोनियम वादन तथा कथक नृत्य जैसी शास्त्रीय कलाओं की प्रस्तुतियाँ होंगी। संगीत प्रेमियों के लिए यह आयोजन एक ओर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और विविधता का आनंद लेने का अवसर प्रदान करेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कलाकारों और देश के अन्य हिस्सों के प्रतिष्ठित कलाकारों के बीच सांस्कृतिक सेतु स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों में सुप्रसिद्ध तबला वादक समुज्ज्वल भट्टाचार्य अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही इस क्षेत्र के एक अन्य उभरते हुए तबला वादक ताराशीष बक्शी भी कार्यक्रम में भाग लेंगे। वर्तमान में वे पुणे में रहकर तबले की विधिवत शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

वहीं, पुणे से आए कलाकारों में सर्वरी पुराणिक कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी, जबकि धवल जोशी बाँसुरी की मधुर स्वर लहरियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। हारमोनियम पर अभिषेक सिंकर संगत करेंगे। इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मेवाती घराने के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार पंडित संजीव अभ्यंकर का खयाल गायन होगा। पंडित जसराज जी के योग्य शिष्य के रूप में विख्यात इस कलाकार की प्रस्तुति शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि पुणे स्थित संस्था ‘स्वर झंकार’ लंबे समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार तथा इसके अध्ययन और साधना को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्यरत है। संस्था न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत को प्रसारित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। विशेष रूप से उभरते हुए कलाकारों की प्रतिभा को व्यापक दर्शक समुदाय के सामने प्रस्तुत करना और उनके कलात्मक विकास को प्रोत्साहित करना संस्था के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य में शिलचर का विशेष स्थान है। इस क्षेत्र में शास्त्रीय संगीत की परंपरा को और अधिक समृद्ध बनाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम संबंधित संस्थाओं की ओर से पूर्वोत्तर भारत में आयोजित की जा रही तीसरी संगीत संध्या है।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुकुल परंपरा के छात्र-छात्राओं द्वारा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति के साथ होगा। इसके माध्यम से नई पीढ़ी के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति उनकी रुचि और अनुराग को प्रोत्साहन मिलेगा। प्रतिष्ठित कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों की सहभागिता इस आयोजन को और अधिक सार्थक बनाएगी।

इस संगीत संध्या को सफल बनाने के लिए गुरुकुल परंपरा के संचालक दीपक रंजन बक्शी, सुतपा बक्शी तथा उनके सुपुत्र और विशिष्ट तबला वादक ताराशीष बक्शी ने विशेष सहयोग प्रदान किया है। उनके सामूहिक प्रयासों और पहल से शिलचर के संगीत प्रेमियों को एक यादगार शास्त्रीय संगीत संध्या का साक्षी बनने का अवसर मिलने जा रहा है।

आयोजकों की ओर से शास्त्रीय संगीत प्रेमियों से विशेष अनुरोध किया गया है कि वे इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर इसे सफल बनाएँ। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।

भारतीय शास्त्रीय संगीत के सुर, ताल, लय और नृत्य के अद्भुत संगम से सजी आगामी 1 नवंबर की यह संध्या शिलचर के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया आयाम जोड़ेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है। साथ ही, स्थानीय प्रतिभाओं के विकास और राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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