शिलचर, 15 जुलाई (रानू दत्त)। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लंबे समय से क्रियान्वित नहीं होने के विरोध में असम के न्यायिक कर्मचारियों ने बुधवार से दो दिवसीय कार्यबहिष्कार और धरना-प्रदर्शन शुरू किया। कर्मचारियों का आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद पिछले 17 वर्षों से शेट्टी आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है, जिससे वे अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हैं।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने शेट्टी आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया था, लेकिन आज तक सेवा नियमों का निर्माण, विभिन्न पदों का सृजन, पदोन्नति की व्यवस्था, विशेष भत्ता, लोक अदालतों में कार्यरत कर्मचारियों के पारिश्रमिक, वेतन विसंगतियों का निराकरण, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, स्थायी यात्रा भत्ता में वृद्धि तथा नई पेंशन योजना (एनपीएस) के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में शामिल करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें अधूरी हैं।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष सिद्धेश्वर मिश्र, सचिव शिवाजी चक्रवर्ती, सहायक सचिव विश्वजीत देव एवं सतरूपा पाल तथा कोषाध्यक्ष विधायक चौधरी कर रहे हैं।
संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें नई नहीं हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप लंबे समय से लंबित हैं। उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारी शीघ्र ही न्यायालय के निर्देशों को लागू नहीं करते, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
संगठन ने राज्य सरकार से तत्काल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने तथा न्यायिक कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।