सादगी की मिसाल: बीटीसी के कार्यकारी सदस्य करमेश्वर राय ने जीता जनता का दिल, सत्ता के शीर्ष पर भी कायम है जमीनी जुड़ाव

कोकराझार 23 अक्टूबर:

​राजनीति और सत्ता की दहलीज पर कदम रखते ही अक्सर जनप्रतिनिधियों के तेवर और जीवनशैली बदलने की शिकायतें आम रहती हैं। लेकिन पूर्वोत्तर के बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (बीटीआर) से एक ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जो आज के राजनीतिक परिवेश में सादगी और जनसेवा की दुर्लभ मिसाल पेश कर रही है।

​बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) के कार्यकारी सदस्य (ईएम) करमेश्वर राय अपने विनम्र व्यवहार और आम जनता से सीधे जुड़ाव को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के बावजूद करमेश्वर राय की कार्यशैली में न तो कोई आडंबर दिखता है और न ही पद का अहंकार।

​आम लोगों के बीच बिना किसी औपचारिकता के मौजूदगी

इलाके के लोगों के अनुसार, करमेश्वर राय का अंदाज अन्य राजनेताओं से काफी जुदा है। वे अक्सर प्रोटोकॉल और सुरक्षा के घेरे से बाहर निकलकर सीधे नागरिकों के बीच पहुंच जाते हैं। राह चलते किसी बुजुर्ग महिला के पास बैठकर उनके सुख-दुख साझा करना हो, बच्चों के साथ घुल-मिलकर हंसी-मजाक करना हो या फिर स्थानीय दुकानदारों व ठेले वालों के पास रुककर उनकी रोजमर्रा की परेशानियां सुनना—यह सब उनकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।

​राजनीतिक शुचिता का प्रेरक उदाहरण

वर्तमान दौर में जब सत्ता और प्रभाव के साथ वीआईपी संस्कृति हावी होती दिखती है, तब करमेश्वर राय का यह सहज रूप स्थानीय जनता के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषकों का भी ध्यान खींच रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे सत्ता में होने के बावजूद खुद को आम नागरिक ही मानते हैं।

​जनसेवा को प्राथमिक दायित्व मानकर काम कर रहे करमेश्वर राय का यह जमीनी जुड़ाव पूरे असम और पूर्वोत्तर में सुशासन व सादगी की एक सकारात्मक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

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