नई दिल्ली: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पोलैंड की कंपनियों से भारत में निवेश करने, स्थानीय समाधान विकसित करने और व्यावसायिक साझेदारियां स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को कूटनीति से आगे बढ़ाकर व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश के क्षेत्रों में भी मजबूत बनाया जाना चाहिए।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की उपस्थिति में आयोजित भारत-पोलैंड व्यापार मंच को मुख्य संबोधन देते हुए सोनोवाल ने कहा कि भारत पोलिश कंपनियों को एक बड़े और तेजी से विकसित हो रहे बाजार, कुशल युवा कार्यबल तथा सुधारों और उद्यमशीलता के प्रति प्रतिबद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था के लाभ प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त २०२४ में पोलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने कहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। इससे आर्थिक सहयोग को और गहरा बनाने के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है।
दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरक क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए सोनोवाल ने कहा कि पोलैंड को इंजीनियरिंग, मशीनरी, खनन प्रौद्योगिकी, परिवहन, पर्यावरणीय समाधान और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त है। वहीं, भारत के पास इन क्षेत्रों के विस्तार के लिए विशाल बाजार, प्रतिभाशाली मानव संसाधन और मजबूत विनिर्माण क्षमताएं हैं।
उन्होंने पोलिश कंपनियों से आग्रह किया, “केवल भारत में अपने उत्पाद न बेचें। भारत में निर्माण करें, भारत में समाधान विकसित करें, भारतीय साझेदार तलाशें और भारत को विकास के मंच के रूप में इस्तेमाल करें।”
सोनोवाल ने नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों में निवेश की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष २०३० तक ५०० गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए लगभग २८० अरब से ३०० अरब यूरो के निवेश की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा उपकरणों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, विद्युत ग्रिड, हरित हाइड्रोजन, पुनर्चक्रण और पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने पोलैंड को अपने यूरोपीय परिचालन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है, जहां वे लगभग १०,००० लोगों को रोजगार देती हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, ५जी अनुप्रयोगों, डिजिटल अवसंरचना, स्मार्ट विनिर्माण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
दोनों देशों के बीच संस्थागत और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने के लिए सोनोवाल ने भारत-पोलैंड स्टार्टअप ब्रिज, इनोवेशन कॉरिडोर तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं क्वांटम संवाद स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के उद्यमियों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों को एक मंच पर लाना है।
सोनोवाल के अनुसार, भारत और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर ६.३६ अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि पोलैंड में भारतीय निवेश ३ अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। भारत में पोलिश कंपनियां पैकेजिंग, विनिर्माण, कचरे से ऊर्जा उत्पादन और विद्युत गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं।
उन्होंने आर्थिक संबंधों के विस्तार के लिए अधिक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि लक्ष्य वर्ष २०३० तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने तक ही सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को केवल एक व्यापार समझौते के रूप में नहीं, बल्कि साझेदारी को मजबूत करने वाले माध्यम के रूप में देखने का आग्रह किया। उनके अनुसार, यह समझौता पोलिश कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अवसर बढ़ाएगा और भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच का विस्तार करेगा।
अपने संबोधन के समापन पर सोनोवाल ने विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण, नवाचार को प्रोत्साहन देने और वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति पोलैंड के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है, जबकि पोलैंड की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताएं भारत के विकास को मजबूती प्रदान कर सकती हैं।
उन्होंने कहा, “भारत की प्रगति पोलैंड के लिए अवसर पैदा कर सकती है। पोलैंड की क्षमताएं भारत को मजबूत बना सकती हैं। और दोनों देशों के व्यवसाय मिलकर दुनिया के लिए समाधान विकसित कर सकते हैं।”