संघ के वरिष्ठ प्रचारक शशिजी द्वारा लिखित पुस्तक “मोर प्राचारक यात्रा” विमोचित 

गुवाहाटी, 1 अप्रैल, 2023: संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री शशिकांत चौथाईवाले द्वारा मूल हिंदी पुस्तक ‘मेरी प्रचारक यात्रा’ का असमिया अनुवाद कर्मयोगी गौरीशंकर चक्रवर्ती हॉल, सुदर्शनालय, गुवाहाटी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय में लॉन्च किया गया। पुस्तक का विमोचन क्षेत्र संघचालक डॉ. उमेश चंद्र चक्रवर्ती एवं संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य वी. भागैया ने किया।

 बैठक की शुरुआत भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। शशिकांत चौथाईवाला 1961 में संघ प्रचारक के रूप में असम आए थे। उनका संघ के त्यागमय जीवन की सभी घटनाओं को पुस्तक में दर्ज किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य 1946 में असम में प्रारम्भ हुआ था। पुस्तक में 1950 से 2020 तक असम में संघ कार्यकर्ताओं की समस्याओं, 1960 के भाषा आंदोलन में आने वाली समस्याओं, 1975 के आपातकाल की समस्याओं, असम आंदोलन और उग्रवादियों की समस्याओं का वर्णन किया गया है।

 उद्घाटनकर्ता डॉ. उमेश चंद्र चक्रवर्ती ने श्री शशि जी के योगदान का उल्लेख किया। डॉ. चक्रवर्ती ने कैसे अपनी जान पर खतरा होने के बावजूद 1961 से संघ की वृद्धि के लिए शशिजी द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। चक्रवर्ती ने संघ को गिरिधर शर्मा, तीर्थनाथ शर्मा, भूमिदेव गोस्वामी और अन्य कई व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने शशि जी के साथ मिलकर किए गए कार्यों का उदाहरण देते हुए सभी से समाज के कार्यों के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शशिजी को सच्चा सम्मान तभी दिया जा सकता है, जब संघ के कार्य में सभी जुड़ेंगे।

एक अन्य लॉन्चर, श्री भागैया ने संतोष व्यक्त किया कि पुस्तक हिंदी, मराठी और बंगाली के बाद असमिया में प्रकाशित हुई है। उन्होंने कहा कि किताब को कुछ दिनों में अंग्रेजी में अनुवाद भी किया जाएगा। पुस्तक असम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का इतिहास है।

 अनुवादक श्री तीर्थंकर दास का परिचय मंच पर कराया गया। बैठक का शुभारंभ प्राची प्रकाशन की ओर से डॉ. गौरांग शर्मा ने किया। अंत में श्री गुरु प्रसाद मेधी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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