कहा—सरकारी नियमों के अनुरूप ईमानदारी से हो रहा कार्य, बदनाम करने की साजिश का लगाया आरोप
बड़खला, 9 अगस्त। संगम क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के विरुद्ध लगाए गए विभिन्न आरोपों को फेडरेशन के पदाधिकारियों ने पूरी तरह निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा है कि कुछ लोग निजी स्वार्थ पूरा न होने के कारण संस्था की छवि खराब करने के लिए सुनियोजित दुष्प्रचार कर रहे हैं।
शनिवार को बड़खला विधानसभा क्षेत्र के बड़यात्रापुर स्थित संगम कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में सीएलएफ पदाधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संस्था सरकारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी ईमानदारी एवं पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। पत्रकार सम्मेलन में संगम की अध्यक्ष सुप्रभा नाथ, पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान बुककीपर नीलूपा यास्मिन मजूमदार, उपाध्यक्ष रहीमा बेगम मजूमदार, वीओ सचिव रेजाना बेगम मजूमदार, दिशा एसएचजी सचिव झुमनी नाथ सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।
पदाधिकारियों ने कहा कि संगम सीएलएफ की क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा है, लेकिन कुछ लोग संस्था की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर कथित रूप से भ्रामक एवं विकृत शिकायतें भेज रहे हैं। उन्होंने इस तरह के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जिन आरोपों का आधार लवली एसएचजी को बताया जा रहा है, वह समूह पहले ही बंद हो चुका है।
संगम की अध्यक्ष सुप्रभा नाथ ने कहा कि संस्था के पदाधिकारी सरकारी नियमों का पालन करते हुए पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मनगढ़ंत कहानियां बनाकर संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की गतिविधियां जारी रहीं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान बुककीपर नीलूपा यास्मिन मजूमदार ने चार स्वयं सहायता समूहों—वुमेन स्टार एसएचजी, सुसेवा महिला एसएचजी, स्टार एसएचजी और ड्रीम वर्ल्ड एसएचजी—के कुछ सदस्यों को महिला उद्यमिता परियोजना से कथित रूप से वंचित किए जाने संबंधी आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि सीएलएफ अथवा वीओ के पास किसी व्यक्ति का नाम इस योजना में शामिल करने या हटाने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने बताया कि योजना के लाभार्थियों के नामों का सत्यापन संबंधित स्तर पर किया जाता है और अंतिम निर्णय जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा लिया जाता है। इसलिए सीएलएफ या वीओ पर किसी को जानबूझकर योजना से वंचित करने का आरोप लगाना उचित नहीं है।
नीलूपा यास्मिन मजूमदार ने बैंक एवं प्रशासन को प्रभावित कर कथित रूप से किसी सिंडिकेट को संचालित करने के आरोपों को भी निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यह आरोप उन्हें पूर्व अध्यक्ष के रूप में बदनाम करने का प्रयास है। उनके अनुसार, संगम सीएलएफ के अंतर्गत आने वाली अन्य ग्राम पंचायतों में किसी प्रकार की शिकायत नहीं है और संबंधित वीओ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल बड़यात्रापुर ग्राम पंचायत से कुछ कथित फर्जी नामों पर हस्ताक्षर एकत्र कर शिकायतें तैयार की गई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में कुछ अवसरवादी लोगों की भूमिका है, जो विभिन्न स्थानों पर शिकायतें भेज रहे हैं।
लवली एसएचजी के नाम पर लगाए गए आरोपों पर उन्होंने कहा कि बैंक के विवरण के अनुसार जिन लोगों ने ऋण लिया था, उन्होंने उसका भुगतान कर दिया है। उनका यह भी दावा था कि जिन लोगों ने लवली एसएचजी के नाम से शिकायतें प्रस्तुत कीं, वे वास्तविक रूप से उस एसएचजी की सदस्य नहीं हैं तथा बैंक रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित समूह पहले ही बंद हो चुका है।
उन्होंने अपने पति सजीब अहमद बरभुइयां को मामले में कथित रूप से अनावश्यक रूप से घसीटे जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शिकायत में जिस व्यक्ति का नाम लिखा गया है, वह उनके पति का सही नाम नहीं है और उनके पति का इस प्रकार के किसी वित्तीय लेनदेन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नाइटिंगेल नामक एसएचजी की ओर से की गई शिकायत को भी कथित रूप से फर्जी बताया।
वहीं, संगम की उपाध्यक्ष रहीमा बेगम मजूमदार ने कहा कि मनगढ़ंत आरोप लगाकर पदाधिकारियों को मानसिक दबाव में डालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे महिलाओं को परेशान करने का गंभीर मामला बताते हुए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से हस्तक्षेप करने तथा पूरे मामले की जांच कर कथित षड्यंत्र में शामिल लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की।
सीएलएफ पदाधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और आरोप लगाने वालों से अपने दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की।