श्री राम दर्शन देंगे             –डोली शाह

“”राम ही आदि है,
 राम ही अंत है,
राम ही इस जगत के,
 असल कंत हैं।””
            सदियों से  हम भारत में श्री राम का नाम सुनते आए हैं। नवजात शिशु से लेकर युवा, वृद्ध, यहां तक कि मृत्यु की अंतिम शरसैया पर भी इस नाम का उच्चारण बड़े ही श्रद्धा भाव से लिया जाता है। यह नाम न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में अपनी  अलग  प्रतिष्ठा रखता है।
        इतिहास गवाह है कि इस नाम की रक्षा हेतु भारत की मिट्टी ने  कितना कुछ झेला है । सदियों से बसा प्रतिष्ठित राम मंदिर जब 1527 -28 में बाबर के मात्र एक आदेश पर छिन-भिन्न कर डाला गया, और न जाने कितनी ही मस्जिदों का निर्माण कराया गया । देश  सांप्रदायिकता की आग से झुलस पड़ा। इस आग से देश का कोई कोना  अछूत ना रहा।
         लेकिन अयोध्या में बाबर द्वारा ही इस काल में एक भव्य मस्जिद का निर्माण करना आग  में घी डालना साबित हुआ और  राम भक्तों के लिए एक जबरदस्त तमाचा । पूरा देश अग्नि की ज्वाला में भड़कने लगा। परिणाम स्वरूप  पामुलापति वेंकट नरसिंह राव जी के प्रधानमंत्री काल में 6 दिसंबर 1992 को कुछ कार सेवक राम भक्तों द्वारा उस जर्जर बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया गया जिससे  हिंदू – मुस्लिम दोनों सम्प्रदायों में आपस में काँटे की टक्कर हुई और हर तरफ जान- माल की क्षति हुई।
         पूरा अयोध्या विवादों के घेरे में आ गया लेकिन राम के भक्तों  ने कभी हार न मानी और अपने प्रयासों में सदा अग्रसर रहे ।
            भारत के जाने-माने पुरातत्वविद ब्रज बासी  लाल जी ने उस काल में अयोध्या नगरी के लिए जितना कुछ किया , उसकी जितनी  तारीफ की जाए , कम है ।  उन्होंने जहां एक तरफ बाबरी मस्जिद के ठीक दक्षिण में राम मंदिर के बारह  स्तंभों का मिलने का प्रमाण दिया तथा  वहां कई हिंदू देवी- देवताओं के आकृति भी देखे जाने का भरपूर दावा किया था।  उन्होंने वहां कुछ कलाकृतियों के अवशेष भी  होने का प्रमाण दिया , जो आज भी जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय जी के पास विद्यमान हैं। इन ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही बी वी लाल जी ने अपनी पूरी टीम के साथ साफ तौर पर कहा था “अयोध्या में राम का अस्तित्व है और सदा रहेगा।”
        उस वक्त के लिए यह  एक बहुत  चुनौती पूर्ण कथन  थी।  इसके लिए उन्हें अनेक विभागीय कार्रवाइयों का भी सामना करना पड़ा था। यहां तक कि उन्होंने अपनी किताब “मैं भारतीय हूं ” मैं अपनी खोज को बहुत सुंदर एवं प्रामाणिक रूप से विस्तार में दिया।
              लंबे विवादों के दौरान पूरे देश में हर दिन दंगों की नई-नई कहानियां बन जाती थीं,  लेकिन  लंबे विवादों के बाद राम नाम के भक्तों और देशवासियों की श्रद्धा स्वीकार हो गई और राम जन्मभूमिविवादों का अंत हुआ। यह संभव हुआ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय से। जिसने श्रीराम जी की सत्ता स्वीकार की। अब श्रीराम जन्म भूमि पर 5 अगस्त 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जी द्वारा भूमि पर पूजन अनुष्ठान किया गया और तभी से मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ जो आज भी सुचारू रूप से चल रहा है।  आज तक की रिकॉर्ड रफ्तार से काम पूरा करने के लिए प्रतिदिन करीब 1600 वर्कर्स को लगाया गया है। करीब 70% कार्य सम्पन्न भी हो चुका है। आगे भी काम जारी है। मंदिर की भव्यता , सुंदरता , आस्था एवं रमणीयता का अद्भुत रूप  प्रस्तुत करती है। हर ईट पर जय श्रीराम अंकित करना अपने आप में एक अलग ही गाथा है। मंदिर के डिजाइन और निर्माण कार्य की नि:शुल्क देख – रेख का काम लार्सन और तू बन तो ब्रुनेई अपने कंधे पर लिया है।
     वैसे तो अयोध्या को श्रद्धा से अनेक नामों से जाना जाता है, जैसे साकेत, रामनगरी और न जाने कितने ही नाम हैं। यह नगर पवित्र सरयू नदी के तट पर बसा हुआ है और वहां अयोध्या जिले का मुख्यालय भी है,इस लिए इसे कोशल जनपद भी कहा जाता है।
          यह परिसर करीब 108 एकड़ के विशालकाय क्षेत्र में फैला हुआ है। अब तक के अनुमानों के अनुसार मंदिर की ऊंचाई करीब 360 मीटर लंबा, 235 मीटर चौड़ा और ऊंचाई करीब 161 मीटर है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर सिंह द्वार, नृत्य मंडप , रंग मंडप ,गुड मंडप और फिर गर्भ गृह  दर्शन की सुविधा की गई है।
       इस मंदिर के गर्भ गृह में साढे 5 फीट लंबा राम लला के बाल स्वरूप की मूर्ति सुसज्जित की जाएगी। राजस्थान से आई मकराना की सफेद संगमरमर से बना यह गर्भ गृह जहां देखते ही बनता है वहीं राम लला के साथ ब्रह्मा , विष्णु, महेश के दर्शन का सुअवसर भी प्राप्त करवायेगा।  रामायण कालीन चित्रों से सुसज्जित दीवारों की कलाएं मानो स्वर्ग की अनुभूति करने में कोई में कोई कसर नहीं छोड़ती । यह कार्य इस महीने के अंत तक पूरा करने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है। यही नहीं दूसरी तरफ मुख्य द्वार के नीचे 2000 लंबी टैनल बनाई जा रही है, वहीं से प्रवेश कर  भक्त जन राम दर्शन तक पहुंच पाएंगे ।यहां बनी एक-एक प्रतिमा बड़ी ही अकल्पनीय ,अविस्मरणीय एवं अपने आप में गाथा कहने योग्य बनाई गई है।
           वैसे तो बनाने में देशभर की वस्तुओ का योगदान हैं, लेकिन राजस्थान की परमार के सफेद संगमरमर की शिलाऐ , नेपाल की कृष्ण गंडकी नदी से शालिग्राम शिलाओं का तथा कर्नाटक से अरकोट स्टोन की दो शिलाओं का अलग ही महत्त्व है। उन्हें राम कारसेवकपुरम में रखा गया है और अभी उड़ीसा और कांची से भी विभिन्न शिलाएं मंगवाई जा रही हैं। उसके बाद ही रामलाल की नई मूर्ति को स्थापित किया जाएगा ।
           पूरे मंदिर का निर्माण कार्य बड़े ही भव्य ढंग से किया जा रहा है । 22 जनवरी 2024 को 400 साल पुराना इंतजार खत्म होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा अनेक साधु संतों की उपस्थिति में दिन के 12:30 बजे प्राण प्रतिष्ठा  करने की तिथि निश्चित की गई है ।
          उससे  पहले एक  से पन्द्रह जनवरी तक अक्षत पूजा  की तिथि निश्चित की गई है । जिसके लिए 100 क्विंटल चावल का भी  आर्डर किया जा चुका है ,जो अक्षत पूजन के बाद भारत के 500 गांव में श्रीराम की तस्वीर एवं प्रसाद के साथ कोने-कोने में भेजा जाएगा।
       वहीं अयोध्या में दीपोत्सव 9 नवंबर से  शुरू होकर 11 नवंबर 2023 को 21 लाख दीपक राम की पैड़ी पर जलाऐ जाएंगे। यही नहीं पूरे भारत का राममय  माहौल बनाने के लिए  पूरे देश में  एक दीपक  जलाया जाएगा।  अब इंतजार की घड़ी लगभग समाप्त ही होने वाली है । 22 जनवरी को सदियों का इंतजार खत्म होगा। हां , मगर रामलाल के प्राण प्रतिष्ठा के तीन दिनों के बाद  ही  आम भक्तों  के लिए  मंदिर का द्वार खोला जाएगा और उनका दर्शन भी हो पाएगा।
      इस युग में – “श्रीराम” नाम के लेते ही विनसत पाप पहाड़।”
        “यही आदि है
      यही अंत है।”
डोली शाह
निकट पी एच ई
पोस्ट सुल्तानी छोरा
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