श्री गौरी में संस्कृत भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र का 12 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग प्रारंभ, 78 प्रशिक्षु ले रहे हैं भाग

शिलचर, 16 जुलाई। संस्कृत भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र का 12 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग गुरुवार से श्री गौरी परिसर में विधिवत प्रारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण वर्ग में पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न प्रांतों से आए 78 प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये प्रशिक्षु समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार तथा शिक्षण का कार्य करेंगे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, वैदिक मंगलाचरण एवं शांति मंत्र के साथ हुआ। मुख्य अतिथि प्रज्ञानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की प्रगति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा का भी निरंतर विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारती ऐसे प्रशिक्षण वर्गों और शिविरों के माध्यम से संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

मुख्य वक्ता एवं कुमार भास्कर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संस्कृत भारती पिछले 45 वर्षों से देशभर में प्रशिक्षण वर्गों और शिविरों का सफल आयोजन कर रही है। इसके परिणामस्वरूप संस्कृत को केवल शास्त्रीय भाषा ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक एवं बोलचाल की भाषा के रूप में भी प्रतिष्ठित करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है।

कार्यक्रम में संस्कृत भारती पूर्वोत्तर भारत न्यास के अध्यक्ष क्षौणिश चंद्र चक्रवर्ती भी उपस्थित रहे। उन्होंने संस्कृत भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक अनुशासन तथा भारतीय परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण वर्ग के वर्गाधिकारी के रूप में असम विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलसचिव शैलेंद्र शील उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा की प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है और आने वाले 12 दिनों तक वे प्रशिक्षण वर्ग के सफल संचालन का दायित्व निभाएंगे।

इस अवसर पर दक्षिण असम प्रांत के प्रबोधन वर्ग का भी शुभारंभ हुआ, जिसमें 50 से अधिक छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम का संचालन वर्ग की मुख्य शिक्षिका श्रीमती कृष्णा सिंह ने किया, जबकि अंत में संचालन समिति के सचिव डॉ. बुद्धदेव पुरकायस्थ ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ।

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